रीवा | जनपद पंचायत गंगेव की ग्राम पंचायत कैथा में मनरेगा के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता के नाम पर बिना उनकी जानकारी और सहमति के मस्टर रोल जारी कर रोजगार दर्शाने तथा भुगतान चढ़ाने का मामला जांच में उजागर हुआ है। जिला पंचायत की जांच रिपोर्ट में ग्राम पंचायत के सचिव, तत्कालीन उपयंत्री और सहायक यंत्री को दोषी पाया गया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम कैथा निवासी सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने शिकायत की थी कि उनके निजी खेत में स्वीकृत खेत तालाब निर्माण कार्य के नाम पर बिना अनुमति उनके नाम से मस्टर रोल जारी कर दिए गए। शिकायत के बाद जिला पंचायत की ओर से कराई गई जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में खेत तालाब निर्माण के लिए 3.85 लाख रुपए की तकनीकी स्वीकृति दी गई थी। कार्य लंबे समय तक बंद रहने पर हितग्राही ने केवल काम शुरू कराने के लिए सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन पंचायत स्तर पर इस शिकायत का हवाला देकर उनके नाम पर मस्टर रोल जारी कर रोजगार दर्शा दिया गया।
मनरेगा पोर्टल के परीक्षण में पाया गया कि मस्टर रोल क्रमांक 9296, 9298 और 9299 में शिवानंद द्विवेदी का नाम दर्ज कर 20 दिनों का रोजगार दिखाया गया। इतना ही नहीं, उनके जॉब कार्ड पर 42.28 रुपए का भुगतान भी दर्ज कर दिया गया, जबकि 1617.36 रुपए की राशि बकाया के रूप में प्रदर्शित होने लगी।
जांच के दौरान तत्कालीन सचिव से संबंधित दस्तावेज, मांग पत्र, कार्यस्थल की तस्वीरें और हस्ताक्षरित मस्टर रोल मांगे गए, लेकिन वे कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। वहीं उपयंत्री और सहायक यंत्री द्वारा बिना वास्तविक कार्य हुए ई-एमबी में मूल्यांकन और ऑनलाइन सत्यापन किए जाने की पुष्टि भी हुई।
जिला पंचायत के मनरेगा लेखाधिकारी योगेन्द्र पाण्डेय ने 31 पृष्ठीय जांच प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत कैथा के सचिव महेश पटेल, तत्कालीन उपयंत्री प्रवीण पाण्डेय तथा तत्कालीन सहायक यंत्री निखिल मिश्रा को दोषी ठहराया है। रिपोर्ट आगे की वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रीवा को भेज दी गई है।
इस खुलासे के बाद जिले के मनरेगा महकमे में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें दोषियों के विरुद्ध होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।




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