टेढ़े-मेढ़े मोड़ पर जीप-बाइक की भिड़ंत, युवक गंभीर; सड़क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल



काछीखेड़ा मोड़ पर हादसा, घायल को भोपाल रेफर किया; ग्रामीण बोले- सड़क पर संकेतक और सुरक्षा इंतजाम होते तो टल सकता था हादसा

आनंदपुर। आनंदपुर क्षेत्र के काछीखेड़ा मोड़ पर बुधवार को जीप और बाइक की आमने-सामने टक्कर में तेंदवानी निवासी गोपाल बंजारे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई। प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक होने पर उन्हें भोपाल रेफर किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शी रिंकेश मालवीय, जो घटना के समय सब्जी बेचने के लिए जा रहे थे, ने बताया कि काछीखेड़ा मोड़ पर जीप और मोटरसाइकिल की आमने-सामने टक्कर हुई। टक्कर के बाद गोपाल बंजारे गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गए। जीप चालक ने तत्काल एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस के पहुंचने पर आसपास मौजूद लोगों की मदद से घायल को अस्पताल भेजा गया। पहले उसे सदगुरु नगर चिकित्सालय ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद लटेरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। लटेरी में डॉक्टरों ने जांच के बाद गंभीर हालत को देखते हुए भोपाल रेफर कर दिया।
सड़क की बनावट और सुरक्षा इंतजाम पर उठ रहे सवाल

हादसे के बाद आनंदपुर से परवारिया, काछीखेड़ा होते हुए सिरोंज के टोरी-बागरोद तक बनी मुख्यमंत्री सड़क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मार्ग पर कई जगह सड़क टेढ़ी-मेढ़ी और घुमावदार है। ऐसे स्थानों पर सामने से आने वाला वाहन अचानक दिखाई देता है। तेज रफ्तार वाहनों के कारण यहां दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण के दौरान संबंधित विभाग के इंजीनियर और ठेकेदार को मार्ग की भौगोलिक स्थिति और खतरनाक मोड़ों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए थे। सड़क के दोनों ओर और खासकर घुमावदार स्थानों पर पर्याप्त संकेत बोर्ड, रिफ्लेक्टर और चेतावनी चिन्ह लगाए जाते तो वाहन चालकों को आगे आने वाले खतरनाक मोड़ की जानकारी पहले ही मिल सकती थी।

संकेत बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए होते तो शायद टल सकता था हादसा

ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मार्ग पर सड़क के दोनों ओर पर्याप्त संकेत बोर्ड लगाए जाने चाहिए थे। खासकर जहां सड़क का मोड़ अचानक आता है, वहां पहले से चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टर होने जरूरी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग और ठेकेदार द्वारा समय रहते इन स्थानों को चिन्हित कर संकेत बोर्ड और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो शायद इस तरह की घटना को टाला जा सकता था।
लोगों का सवाल है कि सड़क निर्माण के समय संबंधित विभाग के इंजीनियरों ने इन खतरनाक मोड़ों का निरीक्षण किस आधार पर किया और ठेकेदार से सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं क्यों नहीं कराई गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क तैयार होने के बाद भी सुरक्षा इंतजामों की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जबकि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

हादसों के बाद जागेगा विभाग या फिर इंतजार रहेगा अगली घटना का?

ग्रामीणों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कुछ समय के लिए जिम्मेदार विभाग सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से समस्या फिर जस की तस रह जाती है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर आनंदपुर से टोरी-बागरोद तक पूरे मार्ग का निरीक्षण करें और दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित करें।

ग्रामीणों ने सड़क के दोनों ओर आवश्यक संकेत बोर्ड लगाने, खतरनाक मोड़ों पर रिफ्लेक्टर और चेतावनी चिन्ह लगाने तथा जहां जरूरत हो वहां सड़क की साइड और घुमाव को तकनीकी रूप से दुरुस्त कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण केवल सड़क बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जरूरी इंतजाम करना भी विभाग और ठेकेदार की जिम्मेदारी है।

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