आनंदपुर। जब व्यवस्था सो जाती है, तो समाज जाग जाता है। सतपाड़ा रोड स्थित शिव मंदिर के पास बने आनंदपुर के मुक्तिधाम की 13 साल से चली आ रही बदहाली अब ग्रामीणों को मंजूर नहीं। पंचायत और प्रशासन की अनदेखी से नाराज़ ग्रामीणों ने खुद जिम्मेदारी उठा ली और जनसहयोग से मुक्तिधाम को संवारने का संकल्प लिया। पहली ही बैठक में 50 हजार रुपए का सहयोग जुटाकर ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि अब वे सरकारी आश्वासनों के भरोसे नहीं बैठेंगे।
2013-14 में बना, देखरेख के अभाव में खंडहर बना
मुक्तिधाम का निर्माण वर्ष 2013-14 में कराया गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह बदहाल हो गया। चारों ओर कंटीली झाड़ियां, गंदगी और गड्ढों का अंबार लगा है। हालात ऐसे हैं कि शव यात्रा लेकर आने वाले परिजनों को भी रास्ता नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
14 मार्च को नायब तहसीलदार और जनपद सीईओ ने स्थल का निरीक्षण किया। सीमांकन और पंचनामा भी बनाया गया तथा पंचायत को 7 दिन में फेंसिंग शुरू करने के निर्देश दिए गए। बावजूद इसके फाइल आगे नहीं बढ़ी। जन चेतना मंच के पूर्व अध्यक्ष विवेक कुशवाहा का कहना है कि अधिकारी केवल औपचारिकता निभाकर लौट गए, कार्रवाई शून्य रही।
सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद सेन, नवीन करेरिया और डॉ. सुरेंद्र उपाध्याय ने व्हाट्सएप के जरिए जनसहयोग अभियान शुरू किया। मंगलवार रात हनुमान मंदिर परिसर में हुई पहली बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर सहयोग दिया। किसी ने 1100 रुपए तो किसी ने 11 हजार रुपए तक दान किए। पहली ही बैठक में 50 हजार रुपए की राशि एकत्र हो गई।
जनसहयोग से होगा समतलीकरण और फेंसिंग
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि अपनों की अंतिम विदाई स्थल की गरिमा का सवाल है। अब जनसहयोग से मुक्तिधाम में समतलीकरण, साफ-सफाई और फेंसिंग का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा।




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