शुभम सोनी लटेरी। तहसील मुख्यालय से महज़ 15–20 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत मोतीपुर आज प्रशासनिक असंवेदनशीलता और जनप्रतिनिधियों की बेरुख़ी का जीता-जागता सबूत बन चुका है। पिछले 6 महीनों से गांव में नल-जल योजना पूरी तरह ठप है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और नेता आंखें मूंदे बैठे हैं।
यह वही मोतीपुर है जिसे कभी जनपद सीईओ और सांसद द्वारा “गोद लिया गया गांव” बताया गया था।
गांव की एकमात्र चालू बोरिंग पर शाम 6 बजे से अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है।
ड्रम, बाल्टी और बर्तन लेकर महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे लाइन में नहीं, संघर्ष में खड़े दिखाई देते हैं।
ग्रामीण मजबूरी में गंदा और बदबूदार पानी पी रहे हैं, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
सवाल साफ है—अगर यहां कोई अनहोनी होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा?
बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज़्यादा पीड़ित
ग्राम की बुजुर्ग महिला गुलाब बाई रोज़ पानी भरने के लिए बोरिंग पर आती हैं। उनका कहना है कि पानी भरना अब रोज़ का संघर्ष बन गया है—ना उम्र की परवाह, ना हालात की।
वहीं ग्राम निवासी फोटो बाई साफ शब्दों में कहती हैं—
“हर रोज़ पानी के लिए मारामारी होती है, शिकायत करते-करते थक गए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।”
ठंड में भी आधी रात तक जागकर पानी भरने की मजबूरी
हालात इतने बदतर हैं कि ठंड के मौसम में भी ग्रामीणों को रात 12 से 1 बजे तक पानी भरना पड़ता है, क्योंकि सुबह बिजली कट जाती है।
क्या यही है सरकार की ‘हर घर जल’ योजना की सच्चाई?
शिकायतें कीं, फोन लगाए—लेकिन जवाब में सन्नाटा
ग्राम निवासी सोनम सीताराम शर्मा बताते हैं कि 6 महीने से बोरिंग सूख चुकी है।
ग्राम पंचायत, विभागीय अधिकारी—सबको कई बार सूचना दी गई, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं बनाई गई।
यहां तक कि क्षेत्रीय विधायक उमाकांत शर्मा को भी फोन किया गया, लेकिन उनके पीए ने यह कहकर फोन काट दिया—
“विधायक जी नहीं हैं।”
इसी पंचायत में जल निगम द्वारा बनाई जा रही पानी की टंकी पिछले 6–7 महीनों से अधूरी पड़ी है। जिसकी शुद लेने कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या नेता नहीं आया जिससे यह पता किया जा सके कि आखिरकार जल निगम द्वारा बनाई जा रही टंकी का कार्य पिछले 6 7 माह बंद क्यों है
इनका कहना
मोतीपुर पचायत की बोरिंग का पानी सूख गया है मैं लगभग एक हफ्ते के अंदर नया बोरिंग करवा कर लोगों की समस्या का निदान करने का प्रयास करता हूं
देवीसिंह एसडीओ PHE




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