प्रशासन की समझाइश के बाद फिर शुरू हुई बोली प्रक्रिया
आनंदपुर । शुक्रवार को आनंदपुर उपमंडी में बाहरी व्यापारी की अत्यधिक खरीदी बोली को लेकर स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी फैल गई। विवाद इतना बढ़ गया कि स्थानीय व्यापारियों ने अपनी असहमति जताते हुए मंडी में नीलामी प्रक्रिया को बंद कर दिया और सभी व्यापारी मंडी परिसर छोड़कर अपने घर चले गए। अचानक हुई इस स्थिति से मंडी में पहुंची किसानों की उपज की बिक्री प्रभावित हो गई, जिससे किसान परेशान और आक्रोशित हो उठे।
धर्मकांटे पर तुलाई का भुगतान भी व्यापारियों द्वारा ही किया जाएगा,
नीलामी बंद होने के कारण अपनी फसल की बेचने को मंडी में बैठे किसानों को भारी समस्या का सामना करना पड़ा। कई किसान सुबह से अपनी उपज लेकर इंतज़ार करते रहे, परंतु बोली प्रक्रिया शुरू न होने से वे असहाय महसूस करते रहे। व्यापारियों की आपसी खींचतान का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा, जिसे लेकर वे गुस्से में आ गए और दोपहर बाद किसानों ने सामूहिक रूप से गुना–लटेरी रोड पर चक्का जाम कर धरना शुरू कर दिया। इससे मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया और यातायात प्रभावित हो गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हुआ। सूचना मिलते ही अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) नितिन जैन, तहसीलदार हेमंत अग्रवाल, पटवारीयों और पुलिसकर्मियों सहित प्रशासन की संयुक्त टीम तुरंत मंडी पहुंची। अधिकारियों ने पहले किसानों से चर्चा कर उन्हें समझाइश दी और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों पक्षों—किसानों और व्यापारियों—की मीटिंग लेकर सभी को एकमत करने का प्रयास किया गया।
प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए कि मंडी परिसर में किसी भी व्यापारी को बिना ठोस कारण के प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा। बाहरी और स्थानीय सभी व्यापारी नियमों के अनुसार खरीदी कर सकेंगे तथा खरीदी गई फसल को अपनी-अपनी गोदाम तक ले जाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी। साथ ही धर्मकांटे पर तुलाई का भुगतान भी व्यापारियों द्वारा ही किया जाएगा, ताकि किसानों को कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
एसडीएम नितिन जैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में मंडी की प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश या किसी भी प्रकार की मनमानी की गई, तो संबंधित व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के हस्तक्षेप और समझौते के बाद अंततः मंडी में बोली प्रक्रिया पुनः शुरू कर दी गई, जिससे किसानों ने राहत की सांस ली।




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