MP NEWS । मध्यप्रदेश में सोयाबीन किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने भावांतर योजना को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। इस बार नियम बदले गए हैं—अब हर पखवाड़े मंडियों में बिके सोयाबीन का औसत भाव निकालकर मॉडल रेट तय होगा। यदि यह रेट(MSP) एमएसपी (₹5,328 प्रति क्विंटल) से कम रहता है तो सरकार अंतर की रकम सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा करेगी।
योजना के तहत किसान 1 नवंबर से 31 जनवरी तक मंडियों में सोयाबीन बेच सकेंगे। इसके लिए 10 से 25 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। खास बात यह है कि अब रेट तय करने के लिए दूसरे राज्यों के भाव नहीं देखे जाएंगे, बल्कि केवल मप्र की मंडियों के आंकड़ों के आधार पर मूल्य घोषित होगा।
पहले ऐसे तय होते थे रेट
पहले मॉडल रेट तीन राज्यों के औसत भाव की तुलना से तय किया जाता था, जिससे मप्र के किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। अब सिर्फ प्रदेश की सरकारी मंडियों के औसत भाव के आधार पर ही मॉडल रेट घोषित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने हाल ही में यह घोषणा तब की, जब लगातार गिरते दाम से किसान परेशान थे।
पिछले साल प्रदेश में 52 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था। इस बार भारी बारिश के चलते 10 से 15 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है।
पारदर्शिता के पुख्ता इंतज़ाम
मंडियों में खरीदी अब कैमरों की निगरानी में होगी। तय कक्ष में ही व्यापार होगा और ऑनलाइन सिस्टम से यह साफ रहेगा कि किस व्यापारी ने कितना माल खरीदा। बाहर बेची गई उपज का रिकॉर्ड भी ई-अनुज्ञा के जरिये मंडी बोर्ड के पास पहुँचेगा।
एक उदाहरण से समझें
मान लें 1 से 15 नवंबर के बीच प्रदेश में 10 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन बिका और इसमें से 6 लाख मीट्रिक टन का भाव औसतन ₹4,500 प्रति क्विंटल रहा। यही मॉडल रेट होगा। इस पर एमएसपी और मॉडल रेट का फर्क—₹828 प्रति क्विंटल—किसानों को भावांतर राशि के रूप में मिलेगा।
भारी बारिश के कारण इस बार उत्पादन में 10-15% की गिरावट का अनुमान है, ऐसे में यह योजना किसानों को सीधी आर्थिक राहत देगी।




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