मध्य प्रदेश में श्रम कानून में संशोधन: फैक्ट्री मज़दूरों को अब 40 दिन पहले देनी होगी धरना-प्रदर्शन की सूचना

भोपाल – मध्य प्रदेश सरकार ने श्रम कानूनों में अहम बदलाव करते हुए एक नया संशोधन विधेयक विधानसभा में पारित किया है। इसके तहत फैक्ट्री में कार्यरत मज़दूरों को अब किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन के लिए फैक्ट्री प्रबंधन को 40 से 42 दिन पहले पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा।

यह बदलाव केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए मॉडल कानून के आधार पर किया गया है, जिसे अब राज्य में लागू कर दिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया। हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के कुछ विधायकों ने इसका विरोध करते हुए मजदूर वर्ग से व्यापक परामर्श की मांग की थी, फिर भी सदन में बहस और हंगामे के बीच यह विधेयक पारित हो गया।

प्रमुख बदलाव:

धरना-प्रदर्शन की सूचना अनिवार्यता: मज़दूरों को अब अचानक किसी मुद्दे पर धरना देने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए उन्हें कम-से-कम 40 दिन पहले फैक्ट्री प्रबंधन को सूचना देनी होगी।

रजिस्ट्रेशन नियमों में संशोधन: अब बिजली से संचालित फैक्ट्रियों में यदि 40 या उससे अधिक मज़दूर कार्यरत हैं, तो फैक्ट्री का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा 20 मज़दूरों पर लागू होती थी।

ठेका श्रमिक सीमा में बढ़ोतरी: ठेका श्रम अधिनियम 1970 के अंतर्गत नियोजन की न्यूनतम सीमा को 20 से बढ़ाकर 50 ठेका श्रमिक कर दिया गया है।

महिलाओं की भागीदारी: पूर्व में पारित संशोधन में महिलाओं के लिए कार्य समय को 9 से बढ़ाकर 10 घंटे करने की सहमति दी गई थी, जिससे उन्हें अतिरिक्त काम के अवसर मिल सकें।


सरकार और विपक्ष की राय:

कांग्रेस ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि श्रमिक और किसान वर्ग की भागीदारी के बिना ऐसा कानून अधूरा है। बावजूद इसके, विधानसभा अध्यक्ष ने बहुमत और प्रक्रियागत सहमति के आधार पर इसे पारित कर दिया।

सरकार की दलील:

सरकार का कहना है कि इन सुधारों से श्रम व्यवस्था अधिक पारदर्शी और संगठित होगी। फैक्ट्री संचालकों को बिजली रियायत और अन्य तकनीकी मदद भी दी जाएगी, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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