नई मार्गदर्शिका लागू, सुविधाओं के साथ जवाबदेही भी बढ़ी, नियुक्ति अब लिखित परीक्षा के बाद
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने ग्राम रोजगार सहायकों के कार्य में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नई मार्गदर्शिका लागू कर दी है। इसके अंतर्गत अब हर ग्राम रोजगार सहायक का हर साल मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें न्यूनतम 60 अंक लाना अनिवार्य होगा। इससे कम अंक लाने वालों को सेवा से बाहर किया जा सकता है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि "प्रदेश का विकास ग्राम पंचायतों से ही संभव है। रोजगार सहायकों की भूमिका अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन तक विस्तारित होगी।"
रियायतें भी शामिल: छुट्टियों से लेकर स्थानांतरण नीति तक
नई मार्गदर्शिका में सिर्फ जिम्मेदारियों की बात नहीं, बल्कि सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है:
13 आकस्मिक अवकाश
3 ऐच्छिक अवकाश
15 विशेष अवकाश
3 वर्षों की सेवा के बाद स्थानांतरण का अधिकार
कर्तव्यों का स्पष्ट निर्धारण, जैसे:
जॉब कार्ड निर्माण
मजदूरी भुगतान
कार्यों की जियो टैगिंग
योजनाओं के समन्वय और रिपोर्टिंग
भविष्य में नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब जिन पंचायतों में नए रोजगार सहायकों की नियुक्ति की जाएगी, वहाँ लिखित परीक्षा अनिवार्य होगी। सरकार इसके लिए एक सिस्टम विकसित कर रही है जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता आधारित हो सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधार का रोडमैप तैयार
मंत्री पटेल ने कहा कि सरकार समावेशी और सतत विकास के उद्देश्य से ग्राम स्तर पर प्रबंधन सुधार का रोडमैप तैयार कर रही है। रोजगार सहायक इसमें एक केंद्र बिंदु होंगे। अब उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक सहायक नहीं, बल्कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयनकर्ता के रूप में होगी।
चुनौती और अवसर दोनों
यह कदम ग्राम रोजगार सहायकों के लिए जहां एक ओर स्थायित्व और सुविधा लेकर आया है, वहीं अब हर साल का मूल्यांकन उनके लिए चुनौती भी साबित हो सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह नया मॉडल गुणवत्ता सुधार में सहायक बनता है या नौकरी असुरक्षा को बढ़ाता है।




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