भोपाल । राजधानी के साकेत नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बैंक मैनेजर अनिल चौरे ने कई लोग के साथ मिलकर एसबीआई को करीब 69 लाख रुपए का चूना लगाया है । इस मामले में लगातार पड़ताल जारी है । विभागीय सूत्रों के अनुसार पर्सनल लोन देने के मामले में सबसे बड़ी अनदेखी सिविल को लेकर की गई है । सिविल स्कोर ठीक नहीं होने बावजूद भी नियमों को दरकिनार करके अपात्रों को पर्सनल लोन दे दिया गया । लोन लेने वालों में 12 लोग ट्राइडेंट लिमिटेड बुदनी में कार्यरत थे , जबकि उन्होंने कर्ज लेने के लिए दस्तावेजों में कूटरचित वेतन पर्ची और परिचय पत्र सिक्योरिटी पेपर मिल नर्मदापुरम् और 2 ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल के लगाए थे । इनकी सिविल रिपोर्ट ठीक नहीं होने और ऋण की पात्रता नहीं होने के बाद भी कर्ज स्वीकृत किया गया था । सभी के फर्जी दस्तावेज के आधार पर ये लोन बांटे गए हैं ।
बैंक अफसरों का कहना है कि बैंक ने इस मामले में एफआईआर कराई है । डेढ़ साल चली जांच के बाद एक्शन एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक माधव नंद परेडा ने तीन जनवरी 2022 में इसकी शिकायत मप्र आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ( ईओडब्ल्यू ) में दर्ज कराई थी । इसके अनुसार शाखा प्रबंधक ने कर्जधारकों के दस्तावेजों की जांच आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से भी नहीं कराई । बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने कर्ज लेने वालों के दस्तावेज देखे बिना उन्हें ऋण स्वीकृत किया । शिकायत के बाद करीब डेढ़ साल बाद इस मामले में एक्शन लिया गया है ।
यह है पूरा मामला
एसबीआई प्रबंधन के अनुसार फर्जीवाड़ा जून से अक्टूबर , 2020 के बीच हुआ । क्षेत्रीय प्रबंधक माधव नंद परेडा ने 3 जनवरी 2022 को इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू में कराई । उप पुलिस अधीक्षक अतुल चौबे ने जांच में पाया कि शाखा प्रबंधक सुनील चौरे ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर 14 ऐसे लोगों को लोन स्वीकृत किए जो एसबीआई की जांच में फर्जी मिले । चौरे ने सत्यापन करने वाली आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारियों और दलालों के साथ मिलकर एसबीआई को 69 लाख रुपए का चूना लगाया । ई ओडब्ल्यू ने 21 लोगों पर धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है ।




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