वन भूमि पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में पथराव पुलिस वालों पर भी हमला उपद्रव, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस


विदिशा/लटेरी. लटेरी थाने में बुधवार को दो समुदाय आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई। देखते ही देखते बाजार बंद हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज कर उपद्रवियों को काबू करने की कोशिश की। विवाद बढ़ता देख आसपास के थानों से भी पुलिस बल भी मंगाया गया। दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। इसके बाद एक पक्ष ने सिरोंज चौराहे पर चक्काजाम लगा दिया।

दरअसल वनभूमि पर कब्जे को लेकर आदिवासियों और यादव समाज के लोगों के बीच बीती रात हुई बहस और गाली गलौंच के बाद बुधवार को लटेरी में दो जगह उपद्रव हो गया। जिसके बाद थाने के सामने ही पथराव और लाठियों से हमला होने लगा। अफरातफरी मच गई। चीख पुकार और हल्ले के बीच क्षेत्र की दुकानें बंद हो गईं। बमुश्किल पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन जब दोनों पक्षों के लोग नहीं माने तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी। यहां से हटाए गए आदिवासी समाज के लोगों ने सिरोंज चौराहे पर चक्का जाम कर दिया। इस उपद्रव की खबर मिलते ही विदिशा से कलेक्टर उमाशंकर भार्गव, एसपी दीपक शुक्ला और डीएफओ ओंकारसिंह मर्सकोले भी मौके पर पहुंचे।

दरअसल पूरा मामला मध्य प्रदेश की विदिशा जिले की लटेरी के ग्राम बांदरसेना में वन विभाग की जमीन पर कब्जे का है। इस जमीन पर आदिवासी और यादव समाज के लोग कब्जे की तैयारी में थे। आदिवासियों ने यहां टपरे डाल दिए जिसे यादव समाज के कुछ लोगों ने तोड़ दिया। इस पर मंगलवार की रात भील आदिवासी समाज के लोगों ने यादवों की बस्ती में पहुंचकर गाली गलौंच कर धमकाया। इस पर बुधवार की सुबह यादव समाज के लोग थाने में शिकायत करने पहुंचे। आदिवासियों को इसकी भनक लग गई और आदिवासियों की भीड़ थाने पहुंच गई। थाने के सामने ही हल्ला बोलते हुए किसी ने पत्थर मार दिया। इस बात से दोनों पक्षों में आक्रोश उमड़ पड़ा और लोग पत्थर तथा लाठियां लेकर सडक़ों पर मारपीट और उपद्रव करने के लिए दौड़ पड़े। पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन उपद्रवियों की संख्या ज्यादा थी, इसलिए पुलिस को फिर भीड़ पर नियंत्रण करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। भीड़ को तितरबितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इस बीच क्षेत्र की सभी दुकानें बंद हो गईं और लोग भागकर छिपने लगे। इससे आदिवासी समाज के लोग यहां से हट गए और फिर सिरोंज चौराहे पर जाकर चक्काजाम कर दिया। उधर सूचना मिलते ही कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से चर्चा कर समझाने का प्रयास किया। बाद मेें दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को रोककर बाकी लोगों को अलग-अलग वाहनों से उनके गांव भेज दिया गया। लटेरी सहित बांदरसेना और रायपुरा में भी पुलिस बल तैनात रहा। बताया गया है कि बांदरसेना में यादवों की बस्ती है, जबकि आदिवासी समाज के लोग वहां से कुछ किमी दूर रायपुरा के हैं। आदिवासियों द्वारा यहां की जमीन पर कब्जा करने से यादव समाज के लोगों को आपत्ति थी कि वे यहां कब्जा करने क्यों आ रहे हैं।

आदिवासी दिवस के दिन संयोग या राजनीतिक या साजिश

जिस घटना को लेकर पूरे जिला प्रशासन उपद्रव को लेकर समझे दे रही थी समझाइए दे रही थी इत्तेफाक से उसी दिन आदिवासी दिवस था और आदिवासी दिवस के दिन हुआ उपद्रव को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म रहा एक बार फिर लटेरी ब्लॉक के आदिवासी चर्चा में हैं। ठीक आज के ही दिन 9 अगस्त 2022 को रायपुरा के चैनसिंह भील और उसकी टोली द्वारा जब जंगल से बड़े पैमाने पर सागौन चुराकर ले जाई जा रही थी तो उस समय वनकर्मियों की उनसे भिड़ंत हुई थी। इस भिड़ंत में आदिवासियों ने पथराव किया था तो वनकर्मियों ने फायर किए थे। इसी फायरिंग में चैनसिंह भील की मौत हो गई थी और उसके छह साथी घायल हुए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश की राजनीति गर्मा गई थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहां प्रशासन को तत्काल मौके पर भेजकर मृतक और घायलों के परिवारों को मदद का ऐलान कर वनकर्मियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया था, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने सरकार को इस मामले में खूब घेरा था। ठीक एक साल बाद आदिवासी दिवस पर फिर ऐसा ही मौका है।

नियंत्रण के लिए आंसू गैस छोड़ी-कलेक्टर

कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने बताया कि वनभूमि पर आदिवासी और यादव दोनों पक्षों के लोग कब्जा करना चाहते थे। आदिवासियों ने बांदरसेना के पास वनभूमि पर टपरे डाल लिए थे, यादव समाज के कुछ लोगों ने उसे तोड़ दिया, इस पर आदिवासी रात को यादवों की बस्ती में गाली देने पहुंच गए। इस पर सुबह यादव समाज के लोग थाने आ गए तो पीछे से आदिवासी भी आ गए। सडक़ पर ही पथराव होने लगा। पुलिस ने नियंत्रण करने के लिए आंसू गैस छोड़ी और दोनों पक्षों को दो अलग-अलग एसडीएम ने अलग रोके रखा। इसके बाद आदिवासियों ने सिरोंज चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। अब सब शांति है।

चंदेरी गांव के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस पर पथराव

लटेरी के बांदरसेना में वनभूमि पर कब्जे को लेकर भीलों और यादव समाज के लोगों में विवाद हुआ था। इसके बाद आदिवासी और यादव समाज के लोग थाने पर एकत्रित हो गए। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी। लेकिन दोनों पक्षों ने थाना परिसर के सामने ही एक दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने दोनों पक्षों को तितरबितर करने के लिए उन्हें खदेड़ा और आंसू गैस छोड़ीं। दोनों पक्षों को अलग कर प्रतिनिधियों से बात की गई है।

-दीपक कुमार शुक्ला, एसपी विदिशा

लटेरी में पथराव की घटना को 15 घंटे भी नहीं हो पाए थे की विदिशा और गुना जिले की सीमा पर लटेरी के गांव चंदेरी में वन विभाग के रेस्ट हाउस पर आदिवासियों ने पथराव कर दिया। रात करीब 10 बजे वन विभाग की सूचना पर लटेरी पुलिस का हमला चंदेरी गांव के लिए रवाना हो गया। एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि इस तरह की सूचना मिली है। बल को रवाना किया गया है।

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