लोकार्पण के दिन चमका विदिशा रेलवे स्टेशन, अब सवाल—क्या रोज मिलेंगी ऐसी सुविधाएं?



शुभम सोनी विदिशा।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित विदिशा रेलवे स्टेशन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देशभर के 75 अमृत रेलवे स्टेशनों के साथ वर्चुअल लोकार्पण किया। मध्यप्रदेश के 13 रेलवे स्टेशन भी इस योजना में शामिल रहे। उद्घाटन के दिन स्टेशन परिसर आधुनिक सुविधाओं, साफ-सफाई, सुरक्षा और आकर्षक सजावट से सुसज्जित नजर आया, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही यात्रियों के बीच बड़ा सवाल उठने लगा कि क्या यह व्यवस्था सिर्फ लोकार्पण तक सीमित रहेगी या आम दिनों में भी यात्रियों को
 
यही सुविधाएं मिलेंगी? 

वहीं करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त शेड, सभी प्लेटफॉर्म पर शौचालय, टिकट काउंटरों पर स्टाफ की कमी और प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव जैसी समस्याएं अब भी बरकरार हैं।
लोकार्पण समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान दिल्ली में व्यस्तता के कारण वर्चुअल माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल, विधायक मुकेश टंडन, जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी, वन विकास निगम के उपाध्यक्ष राममोहन बघेल, भाजपा जिलाध्यक्ष महाराज सिंह ढंगी, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राकेश जादौन, रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य कमलेश सेन सहित जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।
सरकार के अनुसार अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। स्टेशन भवन का सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन के अनुकूल सुविधाएं, एस्केलेटर, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और अन्य यात्री सुविधाएं विकसित की गई हैं। सरकार का दावा है कि इन कार्यों से यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
उद्घाटन के दिन बदली दिखी तस्वीर

कार्यक्रम के दौरान स्टेशन परिसर पूरी तरह साफ-सुथरा नजर आया। प्लेटफॉर्म पर नई डस्टबिन रखी गईं, सभी नलों में पानी उपलब्ध था, पार्किंग व्यवस्थित रही और सुरक्षा के लिए आरपीएफ के जवान तैनात रहे। वर्षों से स्टेशन का उपयोग करने वाले कई यात्रियों ने कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था प्रतिदिन बनी रहे तो यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।
करोड़ों खर्च, फिर भी अधूरी मूलभूत सुविधाएं
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन की बाहरी सुंदरता तो बढ़ी है, लेकिन कई जरूरी सुविधाएं अभी भी अधूरी हैं। प्लेटफॉर्म क्रमांक-1 पर पर्याप्त शेड नहीं होने से गर्मी और बारिश में यात्रियों को परेशानी होती है। प्लेटफॉर्म क्रमांक-2 और 3 पर शौचालय नहीं होने से महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्टेशन पर तीन टिकट खिड़कियां बनाई गई हैं, जिनमें दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग काउंटर भी है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण अधिकांश समय केवल एक ही टिकट खिड़की संचालित होती है, जिससे लंबी कतारें लगती हैं। नए प्रतीक्षालय बनाए गए हैं, लेकिन उनमें बुजुर्गों के लिए आरामदायक बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फुट ओवरब्रिज पर ऊपर जाने के लिए एस्केलेटर उपलब्ध है, जबकि नीचे उतरने के लिए यात्रियों को सीढ़ियों का ही सहारा लेना पड़ता है।

विधायक ने मंच से उठाईं मांगें

कार्यक्रम के दौरान विधायक मुकेश टंडन ने भी स्टेशन की कमियों का उल्लेख करते हुए प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त शेड, सभी प्लेटफॉर्म पर शौचालय और प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग रखी। उन्होंने कहा कि स्टेशन का विकास तभी सार्थक होगा, जब यात्रियों को उनकी जरूरत के अनुरूप सुविधाएं लगातार उपलब्ध हों।

सरकार ने गिनाईं उपलब्धियां

कार्यक्रम को ऑनलाइन वर्चुअल संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे का तेजी से आधुनिकीकरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत, हाइड्रोजन ट्रेन और विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशनों के माध्यम से भारत नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश में रेलवे विकास के लिए पहले की तुलना में कई गुना अधिक बजट उपलब्ध कराया है और प्रदेश में बड़े पैमाने पर विकास कार्य जारी हैं।
अब असली परीक्षा रखरखाव की
लोकार्पण के साथ विदिशा रेलवे स्टेशन को नया स्वरूप जरूर मिला है, लेकिन यात्रियों की नजर अब इस बात पर है कि उद्घाटन के दिन दिखाई गई व्यवस्थाएं रोजमर्रा की व्यवस्था बनती हैं या नहीं। स्टेशन का वास्तविक विकास तभी माना जाएगा, जब साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, शौचालय, टिकट व्यवस्था और अन्य सुविधाएं वर्षभर उसी स्तर पर उपलब्ध रहें, जिस स्तर पर वे उद्घाटन के दिन दिखाई दीं।

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