मानवता को शर्मसार करती तस्वीर: आवारा कुत्तों के झुंड ने जिंदा बछड़े को नोच डाला,


आनंदपुर (विदिशा)। ग्राम पंचायत आनंदपुर में शनिवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई। गांव में एक गाय के मासूम बछड़े को आवारा कुत्तों के झुंड ने जिंदा ही नोचकर मार डाला। इस घटना ने न केवल पशु संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर चर्चा छेड़ दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमलों में कई मवेशी अपनी जान गंवा चुके हैं। कुछ लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई पशुपालक दूध उत्पादन कम होने या पशुओं के अनुपयोगी होने पर उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। ऐसे निराश्रित गोवंश सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भटकते रहते हैं, जहां वे दुर्घटनाओं और आवारा कुत्तों के हमलों का आसान शिकार बन जाते हैं। वहीं आनंदपुर स्थित गौशाला में पर्याप्त क्षमता और व्यवस्थाओं का अभाव भी इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में पशु चिकित्सालय होने के बावजूद पर्याप्त स्टाफ की कमी है। निराश्रित पशुओं की नियमित निगरानी, उपचार और आवश्यक टीकाकरण जैसे कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी प्रबंधन और समन्वित कार्रवाई होती, तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती थी।

शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी

निराश्रित गोवंश की सुरक्षा, गौशालाओं का प्रभावी संचालन, आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण, आवश्यक टीकाकरण और पशु संरक्षण से जुड़े कानूनों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी प्रकार निजी पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करना भी प्रशासन का दायित्व है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि तहसील प्रशासन, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर आवारा गोवंश को सुरक्षित गौशालाओं में पहुंचाए, आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करे तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों और पशुओं को खुले में छोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं।

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