राज्यसभा चुनाव: नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का देर रात धरना, भाजपा-कांग्रेस में तीखी टकराहट


भोपाल। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई। बुधवार को विधानसभा परिसर में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात को देखते हुए विधानसभा के गेट बंद कर दिए गए और परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
दिनभर चले घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के सामने देर रात धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी सहित कई विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। देर रात तक धरना जारी रहा और कई नेता धरना स्थल पर ही लेट गए। स्थिति को देखते हुए धरना स्थल से लेकर मुख्यमंत्री निवास तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नामांकन पत्र में गलत जानकारी देने के मामले में जीतू पटवारी को जनता से माफी मांगनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि कांग्रेस आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाकर मतदाताओं को भ्रमित करना चाहती थी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव अधिकारी ने दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्णय लिया है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राज्यसभा सीट का प्रश्न नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा है।
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भाजपा ने पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा था, तभी स्पष्ट हो गया था कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की राजनीति कर रही है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़े इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक और पारदर्शी बता रही है।

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