रीवा। शिक्षा का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में होने वाले कार्यों, नियुक्तियों, खर्चों, परीक्षा परिणामों और छात्र हितों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून है। इसी विषय पर रविवार को आयोजित 312वें आरटीआई वेबीनार में देशभर के विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, उत्तराखंड के आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ठक्कर सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने किया।स्कूलों और कॉलेजों से क्या-क्या जानकारी मिल सकती है?
वेबीनार में प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने बताया कि सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में आरटीआई के माध्यम से शिक्षकों की पदस्थापना, रिक्त पद, छात्रवृत्ति, भवन निर्माण, खेल सामग्री, पुस्तक वितरण, मध्यान्ह भोजन, परीक्षा परिणाम और बजट संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका, मूल्यांकन प्रक्रिया और अंकसूची से जुड़ी जानकारी भी आरटीआई के जरिए मांग सकते हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ती है और छात्रों को अपने अधिकारों की जानकारी मिलती है।
निजी स्कूलों में भी मिल सकती है जानकारी
विशेषज्ञों ने बताया कि निजी स्कूल और विश्वविद्यालय सीधे तौर पर हर मामले में आरटीआई के दायरे में नहीं आते, लेकिन उनसे संबंधित जानकारी शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय नियामक संस्थाओं या अन्य सरकारी विभागों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। यदि किसी निजी संस्थान को सरकारी सहायता या मान्यता प्राप्त है, तो कई प्रकार की सूचनाएं अप्रत्यक्ष रूप से हासिल की जा सकती हैं।
राहुल सिंह ने बताए महत्वपूर्ण फैसले
पूर्व राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि उनके कार्यकाल से पहले शिक्षा विभाग में कई मामलों में जानकारी प्राप्त करना कठिन था। सूचना आयोग के कई महत्वपूर्ण आदेशों के बाद छात्रों और अभिभावकों को जानकारी मिलने का रास्ता आसान हुआ।
उन्होंने बताया कि निजी शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों में भी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई निर्देश जारी किए गए। समयसीमा में जानकारी नहीं देने वाले अधिकारियों और संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की गई।
क्यों जरूरी है शिक्षा विभाग में आरटीआई?
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आरटीआई एक सशक्त हथियार है। इससे छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों को शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली जानने का अवसर मिलता है। साथ ही भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और लापरवाही पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होता है।
ये जानकारियां मांग सकते हैं
● स्कूल में स्वीकृत और कार्यरत शिक्षकों की संख्या
● छात्रवृत्ति वितरण का रिकॉर्ड
● भवन निर्माण और मरम्मत पर खर्च
● पुस्तक एवं यूनिफॉर्म वितरण की स्थिति
● परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया
● उत्तर पुस्तिका की प्रति
● कॉलेज एवं विश्वविद्यालय की मान्यता संबंधी जानकारी
● शैक्षणिक संस्थानों को मिले सरकारी अनुदान का विवरण
सैकड़ों प्रतिभागियों ने पूछे सवाल
वेबीनार में ग्वालियर, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों प्रतिभागी जुड़े। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा विभाग में आरटीआई लगाने की प्रक्रिया, अपील और शिकायत से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया।




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