मुरैना ।परिवादी द्वारा प्रस्तुति परिवाद में उपभोक्ता आयोग की न्यायपीठ के अध्यक्ष एवम न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद शर्मा, वरिष्ट न्यायिक सदस्य राकेश शिवहरे एवम श्रीमती निधि कुलश्रेष्ठ ने स्टेट बैंक को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता द्वारा 27 वर्ष पूर्व बनवाई गई 5हजार रु की एफडीआर की परिपक्वता भुगतान राशि पर तत्काल 6 प्रतिशत ब्याज और छतिपूर्ती, बादव्याय 3,500 रु राशि उपभोक्ता को अदा करें।
परिवादी सुरेंद्र सिंह यादव द्वारा स्टेट बैंक में वर्ष 1996 में एक एफडीआर 5000 रु की 6 माह के लिए बनवाई गई थी जो जल संसाधन विभाग में सिक्योरिटी के रूप में रखी गई ।कार्य समाप्त होने के बाद जल संसाधन का कार्यालय स्थानांतरित हो जाने के कारण और फाइलों की अत्यता के कारण उक्त फाइल का मिलना परेशानी का सबव बन गया था लेकिन एक लंबे समय बाद वर्ष 2022 में एफडीआर को खोज कर परिवादी को दी गई । परिवादी द्वारा उक्त एफडीआर को संबंधित स्टेट बैंक जीवाजी गंज में भुगतान हेतु पेश किया, परंतु बैंक ने जांच करने के बाद उपभोक्ता को बताया गया कि उक्त एफडीआर का रिकॉर्ड बैंक में नहीं है इसलिए भुगतान किया जाना संभव नहीं है ।बहुत परेशान होने के बाद उपभोक्ता द्वारा उक्त शिकायत को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोसन आयोग में दर्ज कराया गया नोटिस उपरांत जवाब में बैंक द्वारा स्पष्ट किया गया कि उपभोक्ता की उक्त एफडीआर 27 साल पूर्व में बनवाई गई थी जिसका रिकॉर्ड बैंक के पास उपलब्ध नहीं है और यह मार्च 6 माह के लिए बनवाई गई थी जिसका उपभोक्ता को बिना रिन्यूअल के एफडीआर पर अंकित ब्याज 11% की मांग कर रही है जो भुगतान किया जाना संभव नहीं है ।
आयोग द्वारा उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्क सुने गए और अभिलेखों का सघनता से अध्यन कर यह हुकुम दिया गया कि उपभोक्ता द्वारा बनाई गई एफडीआर का भुगतान करने से बैंक मना नहीं कर सकती , ब्याज का निराकरण करते हुए निर्देशित किया कि 6 माह की परिपक्वता के बाद जो राशि बनती है उस राशि पर उसे दिनांक 21. 9. 1996 से भुगतान दिनांक तक 6% ब्याज सहित कुल राशि उपभोक्ता को भुगतान की जाए । अनावेदक बैंक द्वारा उपभोक्ता के प्रति की गई सेवा में कमी के लिए ₹2000 तथा वाद व्यय में ₹1500 अतिरिक्त रूप से भुगतान किए जाने का आदेश दिया है।




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