दो सहेलियों की लव स्टोरी पर कोर्ट ने कहा दोनों बालिग है , अपनी जिंदगी का फैसला ले सकती हैं

दो सहेलियों की लव स्टोरी पर कोर्ट ने कहा दोनों बालिग है , अपनी जिंदगी का फैसला ले सकती हैं
जबलपुर,| जबलपुर दो लड़कियों के बीच बचपन की दोस्ती जवानी में प्यार में बदल गई । जब परिवार और समाज ने उनके रिश्ते पर आपत्ति जताई तो दोनों एक दूसरे के साथ रहने के लिए घर में भाग गई और बेटी के घर से भागने के बाद पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की । जिस पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिश विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच कहा है कि लड़की बालिग है और अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकती है । कोर्ट में भी जज के सामने लड़की ने सहेली के साथ ही रहने की इच्छा जाहिर की थी ।  

क्या है पूरा मामला..

जबलपुर की रहने वाली दो लड़कियां रिलेशन में हैं । बताया गया है कि दोनों बचपन से साथ रहती थीं साथ ही खेलती थीं और साथ ही स्कूल भी जाती थीं । बचपन की दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदल गई । दोनों लड़कियों की लव स्टोरी के बारे में जब परिवार व समाजवालों को पता चला तो उन्होंने इसे लेकर आपत्ति जताई और दोनों को एक दूसरे से मिलने से रोकने की कोशिश की । प्यार में आ रही पाबंदियों को देख 22 साल की सहेली के साथ युवती 14 अगस्त को घर से भाग पिता ने लगाई गई । युवती के घर से भागने हाईकोर्ट याचिका के बाद पिता ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई थी जिसके बाद पुलिस दोनों लड़कियों को भोपाल से अक्टूबर के महीने में पकड़ा था । लेकिन जब 18 साल की युवती को उसके परिजन के घर लेकर पहुंची तो युवती ने परिवार के साथ रहने से मना कर दिया था ।

बेटी के परिवार के साथ रहने से इंकार करने के बाद अक्टूबर के महीने में ही उसके पिता ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी । जिसमें कहा गया कि बेटी को महिला मित्र के बजाय घर पर रहने के लिए मनाने की कोशिशें की , लेकिन वह नहीं मान रही । याचिका को हाईकोर्ट ने मंजूर कर युवती को हाजिर होने का नोटिस तामील कराया । जिसके बाद युवती कोर्ट पहुंची और जज के सामने भी खुद के बालिग होने और समझदार होने के साथ ही अपने पैरों पर खड़े होने की बात कहते हुए सहेली के साथ ही रहने की इजाजत मांगी । जिस पर कोर्ट ने पहले तो दोनों को एक घंटे का समय दिया और जब बाद में भी युवती ने सहेली के साथ ही रहने की इच्छा जाहिर की तो कोर्ट ने कहा कि लड़की बालिग हैं , इसलिए अपनी जिंदगी से जुड़े फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है । 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ