जिला प्रशासन विवादित सरकारी जमीनों का सीमांकन डीजीपीएस मशीन से कराएगा और जरूरत पड़ने पर तार फेंसिंग भी की जाएगी। वर्षों पुरानी सरकारी जमीनों की पहचान भी सैटेलाइट तकनीक की मदद से की जाएगी। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी एसडीएम को सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। कलेक्टोरेट में इसके लिए अलग राजस्व सेल भी बनाया जाएगा।
जिले में तैयार किए जा रहे लैंड बैंक के अनुसार भोपाल में करीब 32 हजार एकड़ सरकारी जमीन चिन्हित की गई है। इनमें 22,250 एकड़ एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली तथा 9,490 एकड़ एक एकड़ से कम क्षेत्रफल वाली जमीन शामिल है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बड़े भूखंडों से अतिक्रमण हटाना होगी।
इस व्यवस्था से पटवारियों को हर बार मौके पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सरकारी और निजी जमीनों की स्थिति तुरंत स्पष्ट हो सकेगी तथा विकास परियोजनाओं और संस्थानों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया भी तेज होगी।




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