भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद पिछले 10 वर्षों में 85 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिनसे दो करोड़ से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि "हर पेपर लीक मामले में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम ही क्यों सामने आते हैं?"
शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार ने भर्ती घोटालों के आरोपियों को संरक्षण देने का काम किया है। उन्होंने व्यापमं घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में गिरफ्तारियां हुईं और न्यायालय में सुनवाई चली, लेकिन बाद में आरोपियों को बरी कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में व्यापमं घोटाला हुआ और वर्तमान सरकार ने भी दोषियों को संरक्षण दिया।
पटवारी ने बताया कि कांग्रेस युवाओं के मुद्दों को लेकर 14 और 15 जुलाई को प्रदेशभर में 'जेन-जी साइक्लोथॉन' का आयोजन करेगी। इस अभियान के माध्यम से बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक अधिकांश सरकारी परीक्षाएं सरकारी संस्थाएं आयोजित करती थीं, लेकिन 2017 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के गठन के बाद कई पेपर लीक के मामले सामने आए। उनका आरोप था कि परीक्षा प्रक्रिया में पेपर सेटिंग से लेकर प्रिंटिंग तक का निजीकरण कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई है।
जयवर्धन सिंह ने कहा कि वर्तमान एनटीए चेयरमैन प्रदीप जोशी के कार्यकाल में नीट परीक्षा से जुड़े पेपर लीक के मामले सामने आए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब प्रदीप जोशी 2006 से 2011 तक मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के अध्यक्ष थे, तब प्रोफेसरों की कथित अवैध भर्ती के आरोप भी लगे थे।




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