रीवा, 28 जून। लोकतंत्र और संविधान विषय पर 314वें राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का केंद्र बिंदु लेखक डॉ. सचिन पेथकर एवं सह-लेखकों की पुस्तक "द इवोल्यूशन ऑफ डेमोक्रेसी ऐज हैपनिंग इन इंडिया" रही। वेबिनार में संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व राजनयिक रविंदर पाल सिंह सहित देशभर के शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, आरटीआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता रविंदर पाल सिंह ने लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों—नागरिक संप्रभुता, संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, शक्तियों के पृथक्करण तथा संस्थागत स्वतंत्रता—पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
लेखक डॉ. सचिन पेथकर और अशोक भाई पटेल ने अपनी पुस्तक के प्रमुख बिंदुओं को प्रस्तुत करते हुए चुनावी व्यवस्था, राजनीतिक दलों की भूमिका, संसद की कार्यप्रणाली तथा लोकतांत्रिक सुधारों की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिनिधि लोकतंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सुधारों का सुझाव दिया।
वेबिनार में आरटीआई कार्यकर्ता संतोष सिंह, प्रोफेसर अश्विन कारिया, शिक्षाविद जगमोहन सिंह तथा वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने चुनाव सुधार, राजनीतिक दलबदल, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही, न्यायिक स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और पारदर्शी शासन व्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा की। कई वक्ताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने के लिए व्यापक संवैधानिक एवं चुनावी सुधारों की आवश्यकता बताई।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक अशोक भाई पटेल ने बूथ स्तर तक स्वायत्त चुनाव आयोग की अवधारणा सहित लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में भविष्य में संवैधानिक और लोकतांत्रिक विषयों पर ऐसे वेबिनारों की श्रृंखला जारी रखने पर सहमति व्यक्त की गई।
कार्यक्रम का संचालन सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने किया। वेबिनार में देवेंद्र अग्रवाल, जयपाल सिंह खींची, नरेश कुमार सैनी, रामदास सहित देशभर से सैकड़ों प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सहभागिता की।




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