आरटीआई कानून में दुष्प्रभावी संशोधन के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रीवा कमिश्नर को सौंपा दिया ज्ञापन


आरटीआई कानून में दुष्प्रभावी संशोधन के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रीवा कमिश्नर को दिया ज्ञापन

 प्रस्तवित डेटा प्रोटेक्शन बिल के नाम पर RTI कानून को कमजोर करने पर सरकार के विरुद्ध आंदोलन तेज

रीवा मप्र में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और सामाजिक कार्यकर्ताओं अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री के नाम कमिश्नर रीवा संभाग को सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन में RTI कानून को प्रभावित करने वाले प्रावधान हटाए जाने की माग।।


रीवा मध्य प्रदेश | भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022 के मसौदे में सूचना के अधिकार कानून पर दुष्प्रभाव रखने वाले प्रावधान को हटाए जाने को लेकर देश के विभिन्न कोनों में सरकार के विरुद्ध आंदोलन तेज हो गया है। रीवा संभाग मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम पर कमिश्नर रीवा संभाग अनिल सुचारी को सौंपे गए ज्ञापन में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के साथ अधिवक्ता पूर्व जनपद उपाध्यक्ष संजय पांडेय, सोशल एक्टिविस्ट अनिल उपकारी, पीयूष पांडेय, अधिवक्ता वृदावन शुक्ला, संदीप तिवारी, शिवेंद्र पांडेय आदि उपस्थित रहे। ज्ञापन में उल्लेखित बिंदुओं में ऐसे प्रावधानों को हटाए जाने की मांग की गई है जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर पर्दा डालकर सूचना का अधिकार कानून कमजोर किया जा रहा है।


 प्रस्तावित डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022 के इन प्रावधानों से पारदर्शिता पर पड़ेगा पर्दा


  डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022 के वर्तमान मसौदे में धारा 2, धारा 29(2) और धारा 30(2) में जो प्रावधान रखे गए हैं उससे आरटीआई कानून पर खतरा है। प्रस्तावित डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022 की धारा 2 की उपधारा 12, 13 एवं 14 में पर्सनल डाटा की जो परिभाषा बताई गई है उसमें न केवल व्यक्ति की जानकारी बल्कि पूरे राज्य, कंपनी अथवा किसी संस्था की भी जानकारी सम्मिलित है जबकि धारा 29(2) में डाटा प्रोटक्शन बिल को अब तक के बनाए गए समस्त कानूनों में सर्वोपरि बताया गया है। इसी प्रकार धारा 30(2) में आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) पूरी तरह से हटा दिया गया है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में आम जनमानस को निजता/व्यक्तिगत/प्राइवेसी के नाम पर लोक हितकर और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार संबंधी कोई भी जानकारी नहीं मिलेगी। 


 संसद और विधायिका को दी जाने वाली जानकारी भी अब आम नागरिको और मीडिया से होगी दूर


   बताया गया की यदि प्रस्तावित डेटा प्रोटेक्शन बिल अपने वर्तमान स्वरूप में लागू हो जायेगा तो अब तक जो जानकारी संसद और विधायिका को प्रदान की जाती थी वह जानकारी आम नागरिक को भी प्राप्त करने का हक आर टी आई के तहत था लेकिन डेटा प्रोटेक्शन बिल यदि अपने वर्तमान स्वरूप में पारित हो जाता है तो अब कोई भी जानकारी आम नागरिक को नहीं मिलेगी क्योंकि धारा 8(1)(जे) का प्रावधान ही पूरी तरह से हटाया जा रहा है। इससे सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार बढ़ेगा और भ्रष्टाचारियों का संरक्षण होगा। 


डेटा प्रोटेक्शन बिल से धारा 29(2) और 30(2) हटाए जाने की माग


   सामूहिक तौर पर सौंपे गए ज्ञापन पत्र में माग की गई है की डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल के प्रस्तावित मसौदे वर्ष 2022 में वह समस्त प्रावधान हटाए जाएं जिससे किसी भी प्रकार आरटीआई कानून प्रभावित होगा। विशेष तौर पर डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022 की धारा 29(2) और 30(2) में संशोधन  किया जाए और वह सभी प्रावधान हटाया जाए जिसमें RTI कानून और इसकी धारा 8(1)(जे) को प्रभावित किया जा रहा है और साथ में जिससे आरटीआई कानून के ऊपर डाटा प्रोटक्शन बिल सर्वोपरि प्रभाव रखेगा वह भी प्रावधान हटाया जाए।

  


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