ईओडब्ल्यू की 4 एफआईआर से खुलासाः सरकारी अधिकारियों ने बनाई 100 करोड़ रुपए की संपत्ति , बिल्डर व परिवार वाले भी शामिल 120 गुना संपत्ति


ईओडब्ल्यू की 4 एफआईआर से खुलासाः सरकारी अधिकारियों  ने बनाई 100 करोड़ रुपए की संपत्ति , बिल्डर व परिवार वाले भी शामिल 120 गुना संपत्ति

ईओडब्ल्यू की 4 एफआईआर से खुलासाः सरकारी अधिकारियों  ने बनाई 100 करोड़ रुपए की संपत्ति , बिल्डर व परिवार वाले भी शामिल 120 गुना संपत्ति


 भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारी अधिकारी के पास करोड़ों रुपए की संपत्ति है । सरकारी नौकरी में रहते हुए भले ही लाखों रुपए वेतन के तौर पर मिले हैं लेकिन संपत्ति करोड़ों रुपए की बनाई है । ऐसे ही कई लोगों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने कार्रवाई की है । ईओडब्ल्यू की 4 एफआईआर से खुलासा हुआ है कि 100 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई गई है । इसमें न सिर्फ परिवार के सदस्य शामिल है , बल्कि बिल्डर भी साथी है । जिन्होंने सरकार की नजरों से बचकर करोड़ों रुपए की अकूत प्रॉपर्टी जमा की है । 10 दिनों के अंदर ईओडब्ल्यू ने ऐसे ही 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है । खास बात है कि कमर्शियल टैक्स अधिकारी के पास 120 गुना ज्यादा संपत्ति मिली है । छतरपुर में सेवा सरकारी समिति के मैनेजर के पास 22 करोड़ रुपए की संपत्ति आंकी गई है , जबकि सरकारी नौकरी में रहते हुए 21 लाख रुपए की मिले हैं । ऐसे ही धनकुबेरों के खिलाफ धोखाधड़ी , आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है । ईओडब्ल्यू सागर , इंदौर , जबलपुर और ग्वालियर ने कार्रवाई की है ।

 करोड़ रुपए की मिली 2 दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी

स्टेट जीएसटी अधिकारी दिलीप कुमार राठौर के खिलाफ ईओडब्ल्यू इंदौर ने आय से अधिक कमाई केस दर्ज किया है । राठोर अभी भोपाल में जीएसटी के एंटी एवेजन विंग में पदस्थ है और मूल रूप से इंदौर का ही है । नियुक्ति 2008 में सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी पद पर हुई थी । प्रमोशन के बाद स्टेट जीएसटी अधिकारी के रूप में हो गई । कुल 14 साल की नौकरी में 56 लाख का वेतन मिला , लेकिन जांच में उनके पास आलीशान बंगला , प्लाट , होस्टल तक मिला है । आय से करीब 120 फीसदी अधिक संपत्ति उनके पास पाई गई है । राठौर का 2008 से अभी तक का कुल वेतन लगभग 56 लाख रुपए बनता है । इसमें से 18 लाख रुपए भी खर्च घटा दिया जाए तो इनके पास सिर्फ 37.52 लाख रुपए बचना चाहिए । आय की तुलना में दिलीप कुमार ने 120.43 प्रतिशत आय ज्यादा की है । इस अनुसार आय से अधिक संपत्ति का मामला ईओडब्ल्यू ने बनाया है ।

बैंक मैनेजर ने किया 1.70 करोड़ का लोन घोटाला

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व मैनेजर सहित 5 के खिलाफ एफ आईआरदर्ज की है । पूर्व बैंक मैनेजर द्वारा कोरोना काल के समय लोगों को लोन देने के नाम पर घोटाला किया था । पूर्व महाप्रबंधक कमल किशोर मिश्रा ने जब घोटाला किया था उस समय संपूर्ण देश में लॉक डाउन लगा हुआ था । बावजूद इसके बैंक के पूर्व मैनेजर ने अपने साथियों के साथ मिलकर तकरीबन 1 करोड़ 70 लाख से अधिक का घोटाला किया था । जबलपुर ईओडब्ल्यू को आज जब सबूत मिलें तो पूर्व मैनेजर सहित पांच लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की है|

   सरकार को लगाई  स्टांप ड्यूटी में लगाए डेढ़ करोड़ की चपत

 जेडीए की विभिन्न योजनाओं में भूमि आवंटन के मामले में करीब डेढ़ करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी चोरी की गई । इनके द्वारा शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है । इनके खिलाफ धारा 420 , 120 बी आदि के तहत मामला दर्ज किया गया है । स्टाम्प ड्यूटी की चोरी उजागर होने के बाद मेसर्स कृष्णा बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के डायरेक्टर शंकर मच्छानी , श्रीजी प्रमोटर्स के डायरेक्टर अमित धवन फरीदाबाद , वर्तमान डायरेक्टर किशोर कुमार बुधवानी और ओएसिस बिल्टमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार निवासी नोएडा से राशि जमा करने के लिए कहा गया था , लेकिन इनके द्वारा राशि जमा नहीं कराई गई । यह बात भी सामने आई कि जेडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने सब कुछ जानकर भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया ।

14 वाहन और 12 प्रॉपर्टी , एजेंसी की पड़ताल जारी

छतरपुर के सेवा सहकारी समिति के मैनेजर जाहर सिंह और परिवार के 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है । जाहर सिंह को साल 1997 में महीने में 480 रुपए मिलते थे । साल 2021 तक 13 लाख 17 हजार रुपए वेतन के तौर पर सरकार ने दिए । ईओडब्ल्यू को 14 वाहन और 12 से अधिक भूमि और प्लॉट मिले हैं । कुल मिलकर 22 करोड़ रुपए से अधिक संपत्ति मिली है । ईओडब्ल्यू का कहना है कि यह मामला शिकायत के आधार पर जांच करने के बाद उजागर हुआ है । अभी पालिसी , बैंक में निवेश , लाकर की जांच नहीं की गई है । इसके अलावा परिवार के सदस्यों की शादी में खर्च की जानकारी नहीं मिली है । संभावना है कि 10 करोड़ से अधिक संपति और भी उजागर हो सकती है । जाहर सिंह के अलावा गुडी बाई , अजय सिंह , अभय प्रताप सिंह , कृष्णा प्रताप सिंह , यादवेंद्र और अंजना के खिलाफ मामला भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है ।






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