हाई कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करते हुए स्कूल वसूल रहा था। मनमानी फीस हाई कोर्ट में याचिका के बाद 21 माह लंबी लड़ाई के बाद आया फैसला SPS सागर पब्लिक स्कूल द्वारा अवैध रूप से वसूली गई 118 बच्चों की फीस वापस लौटाई गई बल्कि कोर्ट के आगे झुक कर माफी मांगी।
शुभम सोनी भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बड़ा और हाई प्रोफेशनल स्कूल का मामला सामने आया है जिसमें कोरोना काल में मां बाप से पढ़ाई के नाम पर स्कूल द्वार पेरेंट्सों से जमकर अवैध तरीके से फीस वसूली जा रही थी।
मामला भोपाल के सागर पब्लिक स्कूल का है कोरोना काल के दौरान SPS सागर पब्लिक स्कूल द्वारा अवैध तरीके से पेरेंट्स से फीस वसूली की जा रही थी। कोरोना काल में बच्चों से ऑनलाइन पढ़ाई और स्मार्ट कंप्यूटर क्लास के बहाने SPS सागर पब्लिक स्कूल पेरेंट्स से जमकर फीस वसूल रहा था।

दरअसल हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि जबतक कोरोना काल खत्म नहीं हो जाता तब तक किसी भी निजी स्कूल द्वारा ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं ले सकेगा हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद भी सागर पब्लिक स्कूल ने हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की बल्कि बच्चों की पढ़ाई के नाम पर पेरेंट्स से अवैध रकम वसूली करता रहा। जिसको लेकर माय पैरंट्स एसोसिएशन ने एक याचिका दायर की थी। जिसमें एसोसिएशन ने स्कूल द्वारा अवैध तरीके से पेरेंट्स पर दबाव बनाकर फीस वसूली के आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में चैलेंज किया एसोसिएशन को स्कूल द्वारा वसूली जा रही निर्धारित फीस कतई मंजूर नहीं थी। माय पेरेंट्स एसोसिएशन सागर ग्रुप के आगे न झुका और ना ही उसके रसूख के आगे एसोसिएशन ने हिम्मत हारी बल्कि स्कूल के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका लगाई और करीब 21 महीने की लड़ाई के बाद पेरेंट्स की जीत हुई माय पेरेंट्स एसोसिएशन ने अपने 118 बच्चों की बढ़ी हुई फीस को पेरेंट्सओ को वापस कराया बल्कि कोर्ट के आदेश की अवमानना करने पर कोर्ट के सामने सागर ग्रुप को झुकने पर मजबूर कर दिया और आखिर सागर पब्लिक स्कूल को हाई कोर्ट में माफी मांगी पड़ी।
माय पेरेंट्स एसोसिएशन ने याचिका में बताया था कि 2020-21 की फीस स्कूल प्रबंधन को 2019 -20 के हिसाब से लेनी थी लेकिन स्कूल प्रबंधन ने बड़ी ही चालाकी करते हुए ट्यूशन फीस में सारी फीस वसूल की एग्जाम फीस में भी इजाफा किया याचिका पर लगातार सुनवाई चली जिसके बाद 21 महीने की लंबी लड़ाई के बाद पेरेंट्स की जीत हुई।
मध्य प्रदेश निधि विद्यालय फीस विनियम अधिनियम 2017 प्रावधान है कि जिला शिक्षा अधिकारी ऐसे स्कूलों पर वैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं लेकिन नहीं की
मध्यप्रदेश में ऐसे कई स्कूल अभी भी बाकी है जिन्होंने कोरोना काल में आपदा को अफसर बनाते हुए पेरेंट्स और बच्चों को पढ़ाने के नाम पर मनमानी फीस वसूली है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय फीस विनियम अधिनियम 2017 मध्यप्रदेश में 2020 से लागू है जिसके अनुसार प्राइवेट स्कूल हर साल सिर्फ 10 फीसदी ही फीस बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है मध्य प्रदेश निजी विद्यालय फीस विनियम अधिनियम 2017 की धारा 9 की और धारा 1और 7 के अनुसार यदि कोई पेरेंट्स फीस वृद्धि के संबंध मैं शिकायत करता है और जांच में उसकी शिकायत सही पाई जाती है तो स्कूल के ऊपर बढ़ी हुई फीस स्टूडेंट को वापस करनी होगी वही जिला समिति और स्कूल पर 2 से ₹6 लाख तक का जुर्माना लगा सकता है अधिनियम की धारा 9 की उप धारा 2 जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी को ऐसे मामलों को स्वयं संज्ञान लेकर स्कूल पर कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन ऐसे मामलों में अधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही जिससे स्कूलों की मनमानी बढ़ रही है। सागर पब्लिक स्कूल पर कार्रवाई तो एक उदाहरण है जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। लेकिन अब सवाल यह खड़ा होता है कि शिक्षा माफिया में बैठे अन्य निजी स्कूलों पर जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा कार्रवाई कब की जाएगी सरकार द्वारा इन शिक्षा के मंदिरों को धंधा बनाने वाले स्कूलों पर सरकार द्वारा कब कार्रवाई की जाएगी।
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