सिरोंज को जिला बनाने को लेकर एक बार फिर मांग उठने लगी है सोशल मीडिया पर सिरोंज को जिला बनाने को लेकर विधानसभा चुनाव आने से पहले ही सामाजिक संगठन एवं राजनीतिक लोगों द्वारा सिरोंज को जिला बनाने की मांग एक बार तेज हो गई है
शुभम सोनी /सिरोंज मध्यप्रदेश के विदिशा में स्थित सिरोंज नगर को जिला बनाने को लेकर एक बार फिर से सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों द्वारा आवाज बुलंद की जा रही है हालांकि सिरोंज जिला बनाने की मांग 1983 से लगातार की जा रही है सिरोंज को जिला बनाने को लेकर हस्ताक्षर अभियान नगर बंद आमरण अनशन सहित कई बड़े आंदोलन इस दौरान किए जा चुके हैं लेकिन सिरोंज लटेरी क्षेत्र की आम जनता को यह सपना लगभग 40 साल बाद भी साकार नहीं हो सका है
कमलनाथ सरकार से जगी थी उम्मीदें
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस कमलनाथ सरकार बनने पर नगर वासियों एवं आसपास की जनता में आशा जगी कि अब कांग्रेस सरकार ने सिरोंज को जिला बनाने का सपना जो कि भाजपा के कार्यकाल में पूरा नहीं हो पाया मैं कांग्रेस सरकार में हो सकेगा सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक उठा पटक जारी था इसी बीच 15 साल बाद सत्ता में आई कमलनाथ सरकार ने चाचौड़ा मैं और नागदा को जिला बनाने को लेकर कैबिनेट में स्वीकृति दे दी जिसके बाद फिर एक बार सिरोंज को जिला बनाने को लेकर सिरोंज विधानसभा क्षेत्र कमलनाथ सरकार के प्रति जबरदस्त आक्रोश दिखाई दिया इस दौरान पूर्व विधायक उमाकांत शर्मा द्वारा व्यापक आंदोलन करके कमलनाथ सरकार का विरोध किया गया वहीं सामाजिक संगठनों द्वारा भी आंदोलन सुर्खियों में बना रहा
विधानसभा चुनाव 2023 से पहले ही गरमा गया सिरोंज जिला बनाने की मांग का मुद्दा
अब 2023 में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं एक बार फिर सोशल मीडिया पर सिरोंज जिला बनाने की मांग उठने लगी है अब सोशल मीडिया पर खुरई को जिला बनाने को लेकर चार्च की जा रही है जिसमें कुरवाई एवं पठारी को मिलाकर खुरई को जिला बनाने की बात की जा रही है जिसके बाद फिर एक बार सिरोंज को जिला बनाने को लेकर मांग की जा रही है कई सामाजिक संगठन पोस्ट के माध्यम से सिरोंज को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं
कई ऐतिहासिक किस्से है जिसमें सिरोंज को जिले की झलक दिखाई देती है
सिरोंज के इतिहास की बात की जाए तो आजादी के पूर्व प्राचीन काल में व्यापारिक नगर सिरोंज मलमल के वस्त्र बनाने के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध रहा है सिक्के ढालने की ढकसाल सिरोंज में ही रही है 1817 में सिरोंज क्षेत्र की कमान राजा मानसिंह गुण को सौंपी गई आज भी उनके वंशज यह निवास कर रहे हैं
चंदेरी रियासत में शामिल शहर सिरोंज महाराज छत्रपाल के अलावा अन्य शासनकाल में होलकर राज्य का जिला भी रहा होलकर राज्य की रानी अहिल्या देवी शासन काल में निर्मित नीलकंठ मंदिर आज भी यहां प्रसिद्ध है इसके साथ ही अंग्रेजों से समझौते के तहत रियासत टोंक सिरोंज 1949 तक जिला रहा
आजादी के बाद रियासत टोंक को राजस्थान राज्य में विलय होने पर सिरोंज को जिले का दर्जा समाप्त कर राजस्थान के जिले कोटा में अनुभाग बना दिया गया जिसके बाद से ही शहर में हमेशा आईएएस अधिकारी नियुक्त होते चले आ रहे हैं वही 1 नवंबर 1956 मध्य प्रदेश राज्य के गठन में राजस्थान के कोटा जिले से पृथक कर के मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में शामिल कर इसको अनुभाग बना दिया गया
सिरोंज को जिला बनाने की मांग को लेकर 28 सिंतंबर को स्कूली छात्र-छात्राओं ने शिक्षण संस्थाओं का बहिष्कार व वकीलों ने न्यायालय में कार्य का बहिष्कार किया। 30 सितंबर को समिति का एक प्रतिनिधि मंडल तत्कालीन राजगढ़ सांसद दिग्विजय सिंह से भेंट कर सिरोंज को जिला बनाने की मांग की। उन्होंने समर्थन करते हुए राजस्व सचिव को पत्र भी भेजा। 26 नवम्बर से 1 दिसंबर तक गॉधी बाजार में जिला बनाने की मांग करते हुए आमरण अनशन किया गया। जो प्रशासन के आश्वासन के उपरांत 90 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। 31 दिसबंर 2006 को नगर में शिवराज सिंह चौहान के प्रथम आगमन पर एवं राज्यपाल बलराम जाखड़ के लटेरी आगमन पर जिला बनाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था।




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