तीन शेड पर व्यापारियों के कब्जे का आरोप, टोकन व्यवस्था नदारद; किसी की मक्का का भाव घटा तो किसी की शिकायत तक नहीं सुनी गई
आनंदपुर। किसानों की मेहनत से तैयार फसल जब कृषि उपज मंडी पहुंचती है तो उन्हें उम्मीद रहती है कि उपज का उचित मूल्य मिलेगा, लेकिन आनंदपुर कृषि उपज मंडी में इन दिनों सामने आ रही अव्यवस्थाएं किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं। मंडी में न तो टोकन व्यवस्था व्यवस्थित नजर आ रही है और न ही नीलामी प्रक्रिया को लेकर किसानों में संतोष है। हालात यह हैं कि किसान दो से तीन दिन तक अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मंडी परिसर में इंतजार करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उन्हें उपज के अपेक्षित दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
29 अक्टूबर, गुरुवार को मंडी में बड़ी संख्या में किसान मक्का और सोयाबीन सहित अन्य कृषि उपज लेकर पहुंचे। मंडी परिसर में वाहनों की संख्या क्षमता से अधिक होने के कारण अव्यवस्थाएं दिखाई दीं। किसानों का आरोप है कि प्रवेश के दौरान नियमानुसार टोकन जारी नहीं किए जा रहे हैं। किसान अपनी सुविधा के अनुसार जहां जगह मिलती है, वहीं ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर देते हैं। इससे वाहनों का क्रम बिगड़ रहा है और बाद में आने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने के साथ वाहन निकालने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।तीन शेड पर व्यापारियों के कब्जे का आरोप, किसान खुले आसमान के नीचे
मंडी परिसर में किसानों की उपज रखने के लिए बनाए गए शेड की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महोटी निवासी किसान प्राण सिंह धाकड़ ने बताया कि मंडी के तीन शेड पर व्यापारियों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जिससे किसानों को अपनी उपज रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली शेड के नीचे खड़ा किया था, लेकिन एक व्यापारी ने वहां से ट्रैक्टर हटवा दिया। इसके बाद उन्हें खुले आसमान के नीचे अपना ट्रैक्टर खड़ा करना पड़ा। किसान का कहना है कि इस संबंध में शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।इसी दौरान हल्की बूंदाबांदी भी हुई, जिससे खुले में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रखी उपज को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई। किसानों का कहना है कि मंडी में शेड की सुविधा होने के बावजूद यदि उन्हें खुले में उपज रखने को मजबूर होना पड़े तो इन व्यवस्थाओं का लाभ किसे मिल रहा है, यह बड़ा सवाल है।
नीलामी प्रक्रिया पर सवाल, बोली शुरू होने के भाव को लेकर किसान नाराज
मक्का की नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी किसानों ने सवाल उठाए हैं। मंडी में मक्का बेचने पहुंचे ऊलाखेड़ी निवासी किसान पवन ने बताया कि उनकी उपज की शुरुआती बोली 2200 रुपये लगाई गई थी, लेकिन व्यापारी के कहने पर बोली 2000 रुपये से शुरू की गई।
किसान का आरोप है कि उन्होंने मक्का के सरकारी भाव की जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इससे किसानों के बीच नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो दिन पहले 2600 रुपये में बिकी मक्का, अब कम भाव मिलने पर जताई नाराजगी
मक्का के भाव में अचानक गिरावट को लेकर सगड़ा गांव से आए किसान अमित ने भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि वह दो दिन पहले भी अपनी मक्का लेकर आनंदपुर मंडी पहुंचे थे, जहां उनकी उपज 2600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी गई थी।
लेकिन दो दिन बाद जब वह दोबारा मक्का लेकर मंडी पहुंचे तो उसी तरह की उपज के लिए कम भाव लगाए गए। किसान ने इस अंतर को लेकर मंडी में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन उनका आरोप है कि उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला।
किसानों के अनुसार पहले मक्का के भाव 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे थे, लेकिन गुरुवार को भाव घटकर लगभग 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गए। किसानों का सवाल है कि दो दिनों के भीतर भाव में इतना अंतर क्यों आया और नीलामी प्रक्रिया में इसकी निगरानी कौन कर रहा है?
टोकन और गेट व्यवस्था पर भी सवाल
किसानों का कहना है कि मंडी में प्रवेश के अंतिम गेट पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टोकन जारी किए जाने चाहिए, ताकि वाहनों का क्रम और नीलामी व्यवस्था व्यवस्थित रहे। लेकिन यहां टोकन व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू दिखाई नहीं दे रही।
किसान जहां जगह मिलती है, वहीं ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर देते हैं। वाहनों का कोई निर्धारित क्रम नहीं होने से कई बार किसानों को अपनी उपज की नीलामी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। वहीं वाहनों के बीच अव्यवस्थित तरीके से खड़े होने के कारण आवाजाही में भी परेशानी होती है।
मंडी निरीक्षक की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
किसानों ने मंडी निरीक्षक भागचंद सिलावट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मंडी में टोकन, वाहनों के क्रम, शेड की व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को लेकर प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है। यदि समय रहते व्यवस्था बनाई जाए तो अनावश्यक भीड़ और विवाद की स्थिति को रोका जा सकता है।
मंडी की अव्यवस्थाओं और व्यापारियों की कथित मनमानी को लेकर कुछ लोगों द्वारा एसडीएम से शिकायत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
किसानों को राहत कब मिलेगी?
आनंदपुर कृषि उपज मंडी में सामने आ रहे इन मामलों ने मंडी प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ किसान दो-दो दिन तक अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार कर रहे हैं, दूसरी तरफ शेड की उपलब्धता, टोकन व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
सवाल यह है कि मंडी में किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए शेड का उपयोग किसानों को क्यों नहीं मिल पा रहा? नीलामी के दौरान भाव में अंतर की निगरानी कौन कर रहा है? किसानों की शिकायतों का निराकरण करने की जिम्मेदारी किसकी है?
अब देखना होगा कि मंडी प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों को राहत देने के लिए टोकन व्यवस्था, शेड के उपयोग तथा पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है।




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