भोपाल सागर। मध्यप्रदेश में शुरू की गई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को लेकर किराए का मुद्दा चर्चा में है। सेवा की बसों में यात्रियों से वही किराया लिया जाएगा, जो निजी यात्री बसों के लिए निर्धारित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब किराया निजी बसों के बराबर ही है, तो आम यात्रियों को इससे कितनी राहत मिलेगी।
हाल ही में प्रदेश में यात्री बसों का किराया बढ़ाया गया है। सामान्य बसों के लिए किराया 1.25 रुपए से बढ़ाकर 2 रुपए प्रति किलोमीटर किया गया है। वहीं बस की श्रेणी के अनुसार डीलक्स, स्लीपर और एसी बसों का किराया सामान्य दर से 25 से 75 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है। इस हिसाब से कुछ एसी लग्जरी बसों में किराया 3.50 रुपए प्रति किलोमीटर तक पहुंच जाता है।
पड़ोसी राज्यों में सामान्य बसों का किराया कम
बस किराए की तुलना करें तो मध्यप्रदेश में सामान्य बस का न्यूनतम किराया 2 रुपए प्रति किलोमीटर है। वहीं राजस्थान और गुजरात में यह दर करीब 95 पैसे प्रति किलोमीटर से शुरू होती है। उत्तरप्रदेश में सामान्य बस का किराया करीब 1.35 रुपए और छत्तीसगढ़ में करीब 1.25 से 1.35 रुपए प्रति किलोमीटर बताया गया है।
| राज्य | न्यूनतम किराया | अधिकतम किराया |
|---|---|---|
| मध्यप्रदेश | ₹2.00 | ₹3.50 |
| उत्तरप्रदेश | ₹1.35 | ₹2.86 |
| राजस्थान | ₹0.95 | ₹2.10 |
| छत्तीसगढ़ | ₹1.25 | ₹2.81 |
| गुजरात | ₹0.95 | ₹2.70 |
राजस्थान में 10 साल बाद मामूली बढ़ोतरी
राजस्थान में अगस्त 2025 में करीब 10 साल बाद यात्री बसों का किराया संशोधित किया गया था। साधारण बस का किराया 85 पैसे से बढ़ाकर 95 पैसे प्रति किलोमीटर किया गया। वहीं सुपर लग्जरी एसी बसों की अधिकतम दर 2.10 रुपए प्रति किलोमीटर तक रखी गई।
इसके मुकाबले मध्यप्रदेश में हालिया संशोधन में सामान्य बस का किराया 1.25 रुपए से बढ़ाकर 2 रुपए प्रति किलोमीटर किया गया। यानी एक ही बार में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सागर से प्रयागराज तक 474 किमी, किराया 641 रुपए
सागर से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों के लिए उत्तरप्रदेश रोडवेज की बस का उदाहरण भी सामने आता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों शहरों के बीच करीब 474 किलोमीटर की दूरी है और बस से सफर का किराया करीब 641 रुपए बताया गया है।
बंद सिटी बसें भी नई सेवा में शामिल होंगी
सागर में मई 2023 में स्मार्ट सिटी और अमृत योजना के तहत सिटी बस सेवा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य शहर के लोगों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराना था। अनुबंध के तहत बस संचालकों को प्रति किलोमीटर 15 रुपए की सब्सिडी देने का प्रावधान बताया गया था।
हालांकि करीब एक वर्ष बाद नगर निगम ने फंड उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए सब्सिडी बंद कर दी। इसके बाद सिटी बस सेवा प्रभावित हुई। अब बंद पड़ी इन्हीं सिटी बसों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के सामने सबसे बड़ा सवाल किराए का है। यदि सरकारी परिवहन सेवा में भी यात्रियों को निजी बसों के बराबर ही भुगतान करना पड़ेगा, तो इसकी उपयोगिता और आम यात्रियों को मिलने वाली वास्तविक राहत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।




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