RTI की राह में चुनौतियों के बीच बदलाव की कहानियां, 320वीं बैठक में देशभर के कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव

रीवा, मध्य प्रदेश। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) आम नागरिकों के हाथ में ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि सूचना हासिल करने की इस प्रक्रिया में आवेदकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को कई स्तरों पर परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। इन मुद्दों के साथ-साथ आरटीआई के माध्यम से हुए सकारात्मक बदलावों पर 9 अगस्त 2026 को आयोजित 320वीं RTI बैठक में देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने चर्चा की।

बैठक में कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सूचना के अधिकार का इस्तेमाल केवल सरकारी रिकॉर्ड हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जनहित के मुद्दों को सामने लाने और व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी काम किया जा सकता है।

बिजली चोरी से लेकर रेलवे व्यवस्था तक उठे मामले

झारखंड के आरटीआई एवं सोशल एक्टिविस्ट सुनील खंडेलवाल ने बताया कि आरटीआई के माध्यम से बिजली चोरी के कथित गलत मामलों को सामने लाने के प्रयास किए गए। इसके अलावा रेलवे से जुड़ी सेवाओं, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं को लेकर भी सूचना के अधिकार का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने सरकारी कार्यालयों में हिंदी में मांगी गई जानकारी का जवाब हिंदी में दिए जाने से संबंधित प्रावधानों के पालन का मुद्दा भी उठाया। रेलवे से जुड़े मामलों में सुधार के लिए किए गए प्रयासों का भी बैठक में उल्लेख किया गया।

ऑनलाइन RTI में जवाब मिलने की प्रक्रिया बनी चुनौती

ग्वालियर के आरटीआई कार्यकर्ता राज तिवारी ने ऑनलाइन माध्यम से आरटीआई आवेदन दाखिल करने की प्रक्रिया और जवाब मिलने में होने वाली देरी पर अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि आवेदन करने के बाद समय-सीमा के भीतर सूचना प्राप्त करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे मामलों में आवेदक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लगातार प्रयास और अपील का सहारा लेना पड़ता है।

व्यक्तिगत समस्या से शुरू हुआ अभियान, पहुंचा जनहित तक

छत्तीसगढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने आरटीआई का इस्तेमाल व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान से शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा व्यापक जनहित के मुद्दों तक पहुंच गया।

उनके द्वारा ब्लड बैंक की व्यवस्थाओं, स्कूलों की फीस, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के साथ-साथ बस और ऑटो जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों की सुरक्षा एवं निर्धारित मानकों से जुड़े विषयों पर भी जानकारी जुटाई गई। उनका कहना था कि सूचनाओं के आधार पर संबंधित विभागों के समक्ष समस्याएं उठाने से कई मामलों में सुधार की दिशा में कदम आगे बढ़े।

जल प्रदूषण का मुद्दा उठाया, प्रताड़ना के अनुभव भी साझा किए

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से जुड़े हरीश सोलंकी ने औद्योगिक अपशिष्ट के कारण जल प्रदूषण की समस्या को बैठक में उठाया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन के लिए सोक-पिट जैसे उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सोलंकी ने अपने अनुभव साझा करते हुए आरोप लगाया कि जनहित के मुद्दे उठाने के दौरान उन्हें कथित रूप से षड्यंत्र और फर्जी मुकदमों का सामना करना पड़ा तथा पुलिस प्रताड़ना का भी अनुभव हुआ। बैठक में ऐसे मामलों को आरटीआई कार्यकर्ताओं के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों के रूप में चर्चा में शामिल किया गया।

देरी और अधूरी जानकारी पर चिंता

बैठक में आरटीआई व्यवस्था के व्यावहारिक पक्ष पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि कई मामलों में निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं होती। कभी-कभी मांगी गई जानकारी अधूरी होने अथवा अपेक्षित रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने जैसी परिस्थितियां भी सामने आती हैं।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि सूचना प्राप्त नहीं होने की स्थिति में प्रथम अपील और आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, जिससे आम आवेदक के लिए प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है।

जुर्माना लगाने के बाद वसूली भी बड़ा सवाल

बैठक में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अधिकारियों पर लगाए जाने वाले दंड और उसकी वसूली से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों का कहना था कि केवल दंड निर्धारित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून के अनुरूप उसकी प्रभावी वसूली भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश में भुगतान ट्रैकिंग मॉडल की चर्चा

बैठक के दौरान मध्य प्रदेश में आरटीआई के जरिए सामने आए एक महत्वपूर्ण मॉडल का भी उल्लेख किया गया। राहुल सिंह के नेतृत्व में रीवा संभाग से शुरू हुए आरटीआई आधारित भुगतान ट्रैकिंग सिस्टम को बाद में प्रदेश के व्यापक स्तर पर उपयोग किए जाने की बात सामने आई।

प्रतिभागियों के अनुसार इस प्रक्रिया के जरिए प्रदेश की बड़ी संख्या में पंचायतों से संबंधित राशन भुगतान और वित्तीय लेन-देन में सामने आई अनियमितताओं को चिन्हित करने का प्रयास किया गया। बैठक में इस मॉडल को सरकारी भुगतान और रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उपयोगी पहल बताया गया।

कार्यकर्ताओं का मानना था कि यदि इस प्रकार के सूचना-आधारित निगरानी मॉडल को प्रभावी प्रक्रिया, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही के साथ लागू किया जाए तो इसे अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है।

रेलवे और सर्कुलर इकोनॉमी पर भी चर्चा

झारखंड के गिरिडीह से जुड़े सुनील खंडेलवाल ने रेलवे से जुड़े मुद्दों के साथ सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा, विलफुल डिफॉल्टर से संबंधित मामलों तथा कोविड-19 के बाद रेलवे स्टेशनों और परिवहन सेवाओं में सामने आई चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने विभिन्न मामलों में आरटीआई के जरिए जानकारी जुटाकर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।

ऑनलाइन बैठक के साथ वैकल्पिक संवाद पर जोर

बैठक के दौरान ऑनलाइन संवाद की तकनीकी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। WebEx और Google Meet जैसे माध्यमों में कनेक्टिविटी अथवा तकनीकी व्यवधान आने की स्थिति में व्हाट्सऐप वीडियो या ऑडियो कॉल जैसे वैकल्पिक माध्यमों के उपयोग का सुझाव भी सामने आया।

लगातार प्रयास से ही प्रभावी होगा RTI

बैठक के समापन पर प्रतिभागियों ने माना कि सूचना का अधिकार तभी प्रभावी सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकता है, जब आवेदक स्पष्ट और व्यावहारिक उद्देश्य के साथ जानकारी मांगे और उसके बाद प्राप्त सूचना का जनहित में उचित उपयोग करे।

कार्यकर्ताओं ने निरंतर प्रयास, वैधानिक अपील प्रक्रिया की जानकारी, आपसी अनुभवों का आदान-प्रदान तथा मीडिया और न्यायिक संस्थाओं के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

बैठक में यह संदेश भी सामने आया कि RTI केवल सूचना मांगने का अधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक भागीदारी को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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