रीवा। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून को अधिक प्रभावी बनाने और लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करने के उद्देश्य से 315वें आरटीआई एवं कानूनी वेबिनार का आयोजन किया गया। "आरटीआई और लोकतांत्रिक जवाबदेही" विषय पर आयोजित इस वेबिनार में आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्रकुमार ठक्कर, मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, कानूनी विशेषज्ञ आत्मदीप सहित विभिन्न राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने भाग लिया। वेबिनार में वक्ताओं ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 केवल एक कानून नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए), अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 से जुड़ा नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 के जन आंदोलनों से शुरू हुई पारदर्शिता की मांग वर्ष 2005 में आरटीआई कानून के रूप में पूरे देश में लागू हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि आरटीआई की सफलता तीन प्रमुख आधारों पर टिकी है—सरकारी विभागों द्वारा स्वतः सूचना का प्रकटीकरण, नागरिकों को निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध कराना तथा सूचना नहीं देने पर अपील और दंड की प्रभावी व्यवस्था।
सूचना आयोगों में लंबित मामलों पर चिंता
वेबिनार में सूचना आयोगों में बढ़ते लंबित मामलों, आयुक्तों के रिक्त पदों और फैसलों में हो रही देरी पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे सूचना पाने का अधिकार प्रभावित हो रहा है। साथ ही आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा, जनहित और गोपनीयता के बीच संतुलन तथा सूचना अधिकारियों द्वारा अनावश्यक देरी जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
नए श्रम कानून और ईपीएफ पर भी चर्चा
सत्र में नए श्रम कानूनों और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़े प्रावधानों पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के साथ श्रम कानूनों या पीएफ संबंधी नियमों का उल्लंघन होता है तो वह श्रम न्यायालय के साथ-साथ आरटीआई के माध्यम से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
देशभर से आए मामलों पर दिए कानूनी सुझाव
वेबिनार के दौरान छत्तीसगढ़ के पर्यावरणीय मामलों, राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत, बिजली चोरी के मामलों में अपील प्रक्रिया, उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के नियमों, सीएम हेल्पलाइन शिकायतों, प्रथम अपील में देरी, महाराष्ट्र के आरटीआई नियमों, पारिवारिक पेंशन विवाद और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को कानूनी रणनीति और कार्रवाई के सुझाव दिए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि आरटीआई आवेदन तैयार करते समय स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी मांगी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर सूचना आयोग, न्यायालय और अन्य वैधानिक संस्थाओं का भी सहारा लिया जाए।
अपील प्रक्रिया के प्रभावी उपयोग पर जोर
समापन सत्र में कानूनी विशेषज्ञ आत्मदीप ने कहा कि केवल शिकायत दर्ज कराने के बजाय नागरिकों को अपील प्रक्रिया का अधिक उपयोग करना चाहिए, क्योंकि अपीलीय प्राधिकारी के पास व्यापक अधिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि आरटीआई को अन्य कानूनी उपायों के साथ जोड़कर उपयोग करने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
वेबिनार के अंत में सभी प्रतिभागियों ने लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने के लिए आम नागरिकों की अधिकाधिक भागीदारी तथा ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।




0 टिप्पणियाँ