बीईओ बोले- अनुमति नहीं दी थी
आनंदपुर/विदिशा। आनंदपुर स्थित पीएम श्री शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य राजेश सिंह मीणा का गुना जिले के मकसूदनगढ़ स्थित शासकीय हायर सेकेण्डरी विद्यालय में हुआ स्थानांतरण अब चर्चा का विषय बन गया है। उपलब्ध दस्तावेज़ों और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
'दी शपथ न्यूज़' के पास उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, आदेश क्रमांक SED/2026/V0/001845 के तहत राजेश सिंह मीणा का स्थानांतरण शासकीय हायर सेकेण्डरी विद्यालय, मकसूदनगढ़ (जिला गुना) किया गया है।
जानकारी के अनुसार, राजेश सिंह मीणा की ड्यूटी वर्ष 2026 की जनगणना से जुड़े कार्य में लगभग 10 गांवों के लिए लगाई गई थी। वहीं, राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट प्रावधान था कि जिन शिक्षकों या कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है, उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। ऐसे में जनगणना ड्यूटी के दौरान हुआ यह स्थानांतरण अब सवालों के घेरे में है।कलेक्टर के सोशल मीडिया पोस्ट से खुला मामला
इस मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब विदिशा कलेक्टर के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट पर एक शिक्षक ने कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से गलत जानकारी के आधार पर स्थानांतरण कराने का मुद्दा उठाया। इसके बाद 'दी शपथ न्यूज़' ने मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और विभागीय रिकॉर्ड की पड़ताल की, जिसमें यह पूरा प्रकरण सामने आया।
प्राचार्य ने क्या कहा?
इस संबंध में 'दी शपथ न्यूज़' की टीम ने प्राचार्य राजेश सिंह मीणा से चर्चा की। उन्होंने बताया कि "अतिशेष शिक्षकों के लिए ट्रांसफर पोर्टल पर आवेदन भरना अनिवार्य था। मेरा फॉर्म खुल रहा था, इसलिए मैंने आवेदन किया और उसी आधार पर मेरा स्थानांतरण हो गया।"
हालांकि, राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति में जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों के स्थानांतरण पर रोक का स्पष्ट प्रावधान होने के कारण यह सवाल बना हुआ है कि ऐसे में उनका स्थानांतरण किस आधार पर स्वीकृत हुआ।
बीईओ बोले- हमने अनुमति नहीं दी थी
वहीं, इस मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि "हमने उन्हें कार्यमुक्त (रिलीव) करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद वे बिना विभागीय अनुमति के वहां कार्यमुक्त होकर चले गए। शासन स्तर से जो भी निर्देश या कार्रवाई होगी, उसका पालन किया जाएगा।"
अब विभागीय कार्रवाई पर निगाहें
उपलब्ध दस्तावेज़ों, विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयानों के बाद अब यह मामला शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बन गया है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है या शासन के निर्देशों की अनदेखी की गई है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग इस पूरे प्रकरण की जांच कर क्या निर्णय लेता है और क्या स्थानांतरण प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।




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