मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद एक और बड़ा घोटाला, हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार, को लगाई फटकार,

मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद एक और बड़ा घोटाला

हाईकोर्ट की शिवराज सरकार को फटकार के बाद  मामला सामने आया

कॉलेजों की मान्यता में बड़ा फर्जीवाड़ा 

हाई कोर्ट की फटकार के बाद 70 कॉलेजों की मान्यता निलंबित
 

भोपाल/मध्यप्रदेश | मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद एक और बड़ा घोटाला सामने आया है| हाईकोर्ट की शिवराज सरकार को फटकार के बाद पूरा मामले का खुलासा हुआ है|  घोटाला  कॉलेजों की मान्यता में बड़ा फर्जीवाड़ा को लेकर है | 
घोटाले ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ा दी है | मुश्किल पार्टी के अंदर भी है और पार्टी के बाहर भी और मुश्किलें हैं | कि कम होने का नाम नहीं ले रही हैं बल्कि एक के बाद एक राज्य में घोटाला के रूप में सामने आ रही है |

 जिसके बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उनकी सरकार मुश्किलें में घिरते नजर आ रही हैं | हाई कोर्ट खंडपीठ ने शिवराज सरकार से कह दिया है | कि सतर्क हो जाएं बहुत गड़बड़ हो रही है एक बार फिर व्यापम घोटाले के संकेत मिल रहे हैं कार्रवाई कीजिए और क्या कार्यवाही की है हमें भी जानकारी दीजिए 
दरअसल मध्यप्रदेश में कुछ माह पहले ही राशन घोटाले का खुलासा हुआ था जिसमें 1 दर्जन से भी अधिक अधिकारी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया इससे पहले भी स्कूली छात्रों को मिलने वाले राशन में बड़ी गड़बड़ी भी सामने आ चुकी है टेक होम रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया था जबकि सबको पता है 10% छात्रों तक ही राशन पहुंच पाता लेकिन प्रदेश में 100% से भी ज्यादा संख्या पार कर गई है बीजेपी ने तो टेक होम रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए कहा था यह तो अंतिम  रिपोर्ट है इसमें तो कई बार संशोधन होते रहते हैं पूरी रिपोर्ट आने दो सब सामने आ जाएगा आप जब विस्तृत रिपोर्ट आने का इंतजार हो ही रहा था कि उससे पहले ही एक और बड़ा घोटाला सामने आ गया

इस बार फिर घोटाला शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है जिसमें व्यापम घोटाले के तार जुड़े होने के संकेत मिल रहे हैं |



 देश में जब कोरोना वायरस तांडव मचा रहा था तो अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी हो गई इस कमी को पूरा करने को लेकर मध्यप्रदेश में  रातों-रात कुत्तामुद्दों की तरह नर्सिंग कॉलेज खुल गए और अगर अंग्रेजी  राज्य शासन से लेकर 2020 तक राज्य में जितने नर्सिंग कॉलेज थे उसके आधे 2 साल में ही खुल गए क्योंकि मामला ऑनलाइन चल रहा था इसलिए एडमिशन ऑनलाइन हुए पढ़ाई ऑनलाइन हुई और सबसे बड़ी बात तो यह कॉलेजों को मंजूरी दी गई मंजूरी से पहले तो यह लग रहा है | मंजूरी की जांच भी ऑनलाइन ही कर दी गई क्योंकि जांच में खुलासा हुआ है कॉलेज दो कमरों के मकान में चल रहा है | लोगों ने अपने घर में ही छोटा सा नर्सिंग कॉलेज खोल लिया है और सबसे बड़ी बात तो यह कि एक ही आदमी एक ही समय में 15 के 15 कॉलेजों में पढ़ा भी रहा है |


दरअसल मामला मंडला भरत इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग  कॉलेज मैं विष्णु स्वर्णकार प्रिंसिपल है | लेकिन इनकी की क्षमताएं अनगिनत है |
इसलिए भी क्योंकि इंदौर के जगत गुरु दत्तात्रेय  कॉलेज ऑफ नर्सिंग में असिस्टेंट प्रोफेसर भी है |
जबलपुर के बंसल एकेडमी नर्सिंग ऑफ साइंस एंड लर्निंग में भी प्रिंसिपल की पदवी संभाले हुए हैं इंदौर के सफायर इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग एंड साइन में बतौर प्रिंसिपल उनका नाम दर्ज मिला है ऐसी गड़बड़ी करके एक दो नहीं पूरे 15 कॉलेज में नौकरी कर रहे हैं |

इतना ही नहीं उनका लीना नाम का एक टीचिंग स्टाफ है अब हम इनका सरनेम इसलिए नहीं लिख रहे हैं | क्योंकि यह 18 कॉलेज में एक साथ पढ़ा रही हैं और हर एक कॉलेज में इनका सरनेम बदल जाता है कहीं कुमारी लीना कहीं सिर्फ लीना कहीं कुछ और कई नाम लिखे गए हैं अलग-अलग कॉलेजों में उनका पद के साथ-साथ नाम भी बदल बदल कर बताया गया है |
दरअसल इस बड़े घोटाले का खुलासा एक जनहित याचिका से हुआ


जो हाई कोर्ट ग्वालियर की एक खंडपीठ में लगाई गई थी और जब हाई कोर्ट ने नोटिस देकर इसकी जांच कराई एक-एक करके बड़ी गड़बड़ी की परतें एक के बाद एक खुलकर सामने आ गए आनन-फानन में सरकार ने 70 कॉलेजों की मान्यताओं को निलंबित कर दिया   रद्द इसलिए भी नहीं किया गया क्योंकि कई छात्रों का भविष्य अंधकार में हो जाता जो कि यहां से अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं |
इस मामले से जुड़े 1,2 कॉलेज नहीं पूरे 200 कॉलेज है जो नियमों को ताक पर रखकर चला जा रहे हैं |


कोरोना के संकट काल के पहले साल 2018-19 में प्रदेश में 448 प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज थे लेकिन कोरोना के संकट में इसकी संख्या 1 साल में तेजी से बढ़कर 667 हो गई की इसी दौरान अस्पतालों में मरीजों के लिए बिस्तर कम पड़ गए लोग प्राथमिक उपचार के लिए तरस गए नियमों के हिसाब से हर नर्सिंग कॉलेजों के पास खुद का कम से कम 100 बेड का परमानेंट अस्पताल होना चाहिए जहां छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कराई जा सके लेकिन जब कॉलेज ही दो कमरे में संचालित हो रहा है तो अस्पताल कहां से आएगा नियमों को ताक पर रखकर खोले गए नर्सिंग कॉलेजों के पास अस्पताल तो छोड़िए बिल्डिंग मूलभूत सुविधा और संसाधन और फैकल्टी तक नहीं है |

अब जब जांच हो रही है तो सारी व्यवस्थाएं कागजों में ही मिल रही है और हाईकोर्ट को कहना पड़ रहा है संभल जाइए देश के भविष्य का सवाल है  युवाओं के शिक्षा का सवाल है |

हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्देश के बाद सीबीआई ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में संचालित 35 कॉलेजों की संबद्धता और मान्यता की जांच कर रही है | इसमें 10 कॉलेज बंद हो गए हैं 25 कॉलेजों के आधे अधूरे दस्तावेज सीबीआई ने नर्सिंग काउंसलिंग के जप्त कर ली है जिस तरह की गड़बड़ी इन कॉलेजों में हुई है इस तरह की गड़बड़ी प्रदेश के 600 कॉलेजों में सामने आ रही है |


जब जांच की तो सब कॉलेजों में ही मिले इस मामले को लेकर जनवरी 2022 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई




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