फायर फाइटर्स के कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा
भोपाल ईदगाह स्थित क्लोरीन गैस रिसाव की सूचना मिलते ही मोर्चा संभाल लिया फतेहगढ़ से दमकलों सहित फायर फाइटर्स मौके पर पहुंच गए। फायर फाइटर ब्रीथिंग आपरेटर (बीए) सेट पहनकर सिलेंडर का लीकेज बंद करने की कोशिश की गई, लेकिन सिलेंडर का ज्वाइंट खुलने से ऐसा नहीं हो सका। जिसके बाद क्रेन की मदद से करीब डेढ़ टन वजनी के क्लोरीन सिलेंडर को उठाकर पांच फीट गहरे वाटर टैंकर में डाला गया। साथ ही क्लोरीन को डिजाल्व करने के लिए कास्टिक सोडा और चूना मिलाया गया।
जंग लगे सिलेंडर से हुई गैस रिसाव
इस पूरे मामले में बताया जा रहा है कि क्लोरीन सिलेंडर का वजन करीब डेढ़ टन होता है, जिसमें 900 किलो लिक्विड क्लोरीन गैस भरी होती है। जलशोधन संयंत्र में एक सिलेंडर तीन से चार दिन चलता है। प्लांट में जो क्लोरीन सिलेंडर रखे हुए हैं, उनमें से ज्यादातर सिलेंडरों में जंग लग चुकी है। कई सिलेंडरों में जंग की वजह से नोजल के आसपास का हिस्सा कमजोर हो चुका है। जिस सिलेंडर से गैस का रिसाव हुआ उसके ज्वाइंट के आसपास भी जंग लगी हुई थी, जिसकी वजह से ज्वाइंट खुल गया।
पीड़ितों कर रहे हैं मुआवजे की मांग
गैस रिसाव की घटना के बाद जब लोगों को मालूम हुआ कि फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस के रिसाव हुआ था, तो लोग सड़क पर इकट्ठा हो गए और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों का कहना था कि उनके घरों में बच्चे और बुजुर्ग बीमार हो गए हैं। कई लोगों को अस्पताल लेकर जाना पड़ा है। गैस की वजह से आंखें सुर्ख लाल हो रही है। कई लोगों को चक्कर आ रहे हैं और कई को उल्टियां हो रही हैं। ऐसे में नगर निगम से मुआवजे की मांग कर रहे हैं
इनका कहना
इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर अविनाश लवानिया द्वारा बताया गया है कि फिल्टर प्लांट में क्लोरीन मिलाने के दौरान गैस रिसाव होने से यह हादसा हुआ है। इससे कुछ लोगों की आंखो में जलन और दम घुटने की शिकायत आई है। उनकी तबियत बिगड़ने पर हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालात इस तरीके से काम कर लिए गए
- अवनीश लवानिया, कलेक्टर भोपाल




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