10 लाख के भवन में राशि निकालने का आरोप, ग्रामीण बोले- काम नहीं हुआ तो सामग्री कहां गई? 25 लाख के दूसरे भवन में पुरानी ईंट-सरिया लगाने का भी दावा
आनंदपुर/गोलाखेड़ा। ग्राम पंचायत गोलाखेड़ा के ग्राम कोलापुर में सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत के निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक भवन के मामले में पहले भी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से अब मामला CM हेल्पलाइन तक पहुंच गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत राशि में से कुछ राशि निकाल ली गई, जबकि मौके पर अपेक्षित निर्माण कार्य नहीं हुआ। अब CM हेल्पलाइन में की गई शिकायत के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हैं।
10 लाख के सामुदायिक भवन को लेकर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार ग्राम कोलापुर में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अधोसंरचना योजना के अंतर्गत करीब 10 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य से संबंधित राशि का भुगतान आहरण किए जाने के बावजूद मौके पर काम की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण कार्य नहीं हुआ या अधूरा रहा, तो उसके लिए निकाली गई राशि का उपयोग किस मद में हुआ और संबंधित सामग्री कहां है? उनका कहना है कि इसकी जांच मौके के भौतिक सत्यापन के साथ पंचायत के रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
सचिव ने माना- कुछ राशि निकाली, बारिश के कारण नहीं हो सका काम
मामले में ग्राम पंचायत सचिव गजराज सिंह जादौन का कहना है कि सामुदायिक भवन के लिए कुछ राशि निकाली गई है, लेकिन बारिश के कारण निर्माण कार्य नहीं हो सका था। उनका कहना है कि अब कार्य कराया जाएगा।
सचिव के इस जवाब के बाद ग्रामीणों का सवाल और गंभीर हो गया है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि राशि निकाल ली गई थी और बारिश के कारण निर्माण कार्य नहीं हो सका, तो निर्माण के लिए खरीदी गई सामग्री वर्तमान में कहां रखी है? क्या सामग्री की खरीद हुई है, उसके बिल-वाउचर उपलब्ध हैं और क्या वह सामग्री मौके पर सुरक्षित है? इन सवालों का जवाब पंचायत के दस्तावेज और मौके की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
कोलापुर में दूसरे सामुदायिक भवन के निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस भवन के लिए करीब 25 लाख रुपए की राशि स्वीकृत है, जो स्टांप ड्यूटी से प्राप्त राशि से निर्माण कार्य के लिए बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में क्षतिग्रस्त भवन से निकाली गई ईंट और सरिया का इस्तेमाल नए सामुदायिक भवन के निर्माण में किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नए भवन के लिए नई सामग्री की राशि स्वीकृत की गई है तो पुराने भवन से निकली सामग्री का इस्तेमाल क्यों किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
हालांकि पुराने भवन की सामग्री के इस्तेमाल और भुगतान संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक स्थिति निर्माण स्थल के भौतिक सत्यापन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
सरपंच और रोजगार सहायक के रिश्ते को लेकर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर एक और सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पंचायत के सरपंच और रोजगार सहायक आपस में भाई हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि पंचायत के विभिन्न निर्माण कार्यों में आपसी मिलीभगत से शासकीय राशि के उपयोग में अनियमितता हो सकती है।
यह ग्रामीणों का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड की जांच और जिम्मेदार पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
सिर्फ सामुदायिक भवन नहीं, दूसरे कामों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने अधिकारियों से केवल सामुदायिक भवन ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत में पिछले वर्षों में कराए गए अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में चबूतरा निर्माण सहित कई अन्य कार्यों में भी कथित अनियमितताओं की शिकायतें हैं और जांच होने पर कई मामलों की परतें खुल सकती हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के सभी संबंधित कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज काम की तुलना वास्तविक निर्माण से की जाए।
अब CM हेल्पलाइन शिकायत के बाद कार्रवाई का इंतजार
सामुदायिक भवन को लेकर पहले जिला पंचायत CEO से शिकायत किए जाने के बाद अब CM हेल्पलाइन में भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब देखना यह है कि वरिष्ठ कार्यालय शिकायत पर किस स्तर की जांच कराता है।
ग्रामीणों की मांग है कि स्वीकृति आदेश, तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति, माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी के दस्तावेज, भुगतान विवरण, जियो-टैग फोटो और मौके के भौतिक सत्यापन के आधार पर जांच कराई जाए।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। यदि रिकॉर्ड और मौके के निर्माण में अंतर मिलता है तो जिम्मेदारी तय हो सकती है। वहीं यदि पंचायत के दस्तावेज और मौके की स्थिति सही पाई जाती है तो ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब निर्माण कार्य नहीं हुआ तो निकाली गई राशि का इस्तेमाल कहां हुआ और यदि निर्माण सामग्री खरीदी गई थी तो वह सामग्री कहां है? इन सवालों के जवाब अब वरिष्ठ अधिकारियों की जांच से मिलने की उम्मीद है।




0 टिप्पणियाँ