रीवा। जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ग्राम पंचायत सरई कला के अंतर्गत रोझोही गांव में प्रस्तावित परियोजना के लिए साइट चयन की प्रक्रिया के तहत भू-तकनीकी जांच और बोर लॉगिंग का काम किए जाने की तैयारी है। परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) से जुड़ी है। साइट चयन की प्रक्रिया में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्टैंडिंग साइट सिलेक्शन कमेटी के स्तर पर आवश्यक परीक्षण और अध्ययन कराए जाने हैं।
कलेक्टर कार्यालय से अधिकारियों को निर्देश
अपर जिला दंडाधिकारी, रीवा की ओर से 21 अगस्त 2026 को जारी पत्र क्रमांक 117/आर्म्स लाय/2026 के माध्यम से सिरमौर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार तथा ग्राम पंचायत सरई कला और रोझोही के सरपंच-सचिवों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पत्र में प्रस्तावित जांच कार्य के लिए जरूरी अनुमति और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने को कहा गया है।
प्रस्तावित स्थल रोझोही गांव में अक्षांश 24°52'32.15" उत्तर और देशांतर 81°29'55.01" पूर्व बताया गया है।
आठ स्थानों पर होगी ड्रिलिंग
प्रस्तावित भू-तकनीकी अध्ययन के तहत कुल आठ बोर होल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें चार बोर होल करीब 100 मीटर तथा चार बोर होल करीब 50 मीटर गहराई तक किए जाने हैं। जांच पूरी होने के बाद इन बोर होल को नियमानुसार बंद करने की बात पत्र में कही गई है।
जियो-टेक्निकल जांच का काम फुग्रो एजेंसी से जुड़े होने की जानकारी दी गई है, जबकि भूवैज्ञानिक एवं जियो-फिजिकल अध्ययन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (NIRM) द्वारा किए जाने का उल्लेख है। कार्य में एनपीसीआईएल के तकनीकी मानकों का पालन किए जाने की बात भी कही गई है।
परियोजना को लेकर आमने-सामने दावे
परियोजना समर्थक पक्ष परमाणु ऊर्जा को कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखता है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर परियोजना से संभावित विस्थापन, पर्यावरणीय प्रभाव और परमाणु सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
विरोध कर रहे लोगों की ओर से रेडिएशन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई गई है। हालांकि, किसी परियोजना के वास्तविक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन उसके डिजाइन, सुरक्षा मानकों, नियामकीय मंजूरियों और वैज्ञानिक पर्यावरणीय अध्ययन के आधार पर किया जाना होता है।
ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की भूमिका पर नजर
प्रशासनिक पत्राचार सामने आने के बाद अब स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि प्रस्तावित परियोजना को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी और स्थानीय आपत्तियों पर प्रशासन किस तरह विचार करेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने जताया विरोध
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने प्रस्तावित परियोजना का विरोध किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देने और स्थानीय स्तर पर विरोध दर्ज कराने के बावजूद परियोजना से संबंधित गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।
द्विवेदी ने आरोप लगाया कि परियोजना से क्षेत्र के लोगों के विस्थापन और भविष्य में स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि रोझोही में परमाणु परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो स्थानीय लोग इसका विरोध करेंगे और जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर भू-तकनीकी जांच की प्रक्रिया प्रस्तावित है। आगे साइट चयन, वैधानिक स्वीकृतियों, पर्यावरणीय आकलन और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं के बाद ही परियोजना की स्थिति स्पष्ट होगी।




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