हाई कोर्ट ने पन्ना कलेक्टर के खिलाफ जारी किया था गैर-जमानती वारंट,


आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी, व्यक्तिगत पेशी में कलेक्टर ने मांगी माफी; बताया- आदेश का कर दिया पालन

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व में दिए गए आदेश का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। कोर्ट ने कलेक्टर की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ ही पूर्व आदेश का पालन कराने के निर्देश दिए थे। वारंट की तामील की जिम्मेदारी पन्ना पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई थी।

बुधवार को कलेक्टर उषा परमार न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। उन्होंने न्यायालय से माफी मांगी और बताया कि हाई कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन कर दिया गया है।

90 दिन में अभ्यावेदन का निराकरण करने के थे निर्देश

मामला सेवानिवृत्त कर्मचारी जाविन आरा रिजवी की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने नियमितीकरण और अन्य वेतन संबंधी लाभ दिए जाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित अभ्यावेदन पर 90 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।

नोटिस के बाद भी न पेश हुईं, न अनुपालन रिपोर्ट दी

निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि अवमानना मामले में 4 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी होने के बावजूद कलेक्टर की ओर से न तो अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराई गई और न ही कोर्ट के आदेश के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

संपर्क अधिकारी नियुक्त करने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

रिकॉर्ड के अनुसार कलेक्टर ने 5 अक्टूबर 2025 को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर नोटिस प्राप्त होने की जानकारी दी थी। साथ ही कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी को मामले में संपर्क अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं किए जाने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया।

कलेक्टर की पेशी सुनिश्चित करने जारी हुआ था वारंट

मामले की परिस्थितियों को देखते हुए एकलपीठ ने कलेक्टर उषा परमार की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने और पूर्व आदेश का पालन कराने के लिए गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसकी तामील की जिम्मेदारी पन्ना पुलिस अधीक्षक को दी गई थी।

बुधवार को कलेक्टर के व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने और आदेश के पालन की जानकारी देने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के समक्ष हुई।

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