रीवा, 27 सितंबर 2026। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 के प्रभावी क्रियान्वयन, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली को लेकर रविवार को तीन घंटे की ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली बैठक में आरटीआई विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रतिभागियों ने सूचना के अधिकार को प्रभावी बनाने से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की।
बैठक में मुख्य वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने धारा 4 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा स्वतः सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून की मूल भावना यह है कि महत्वपूर्ण सार्वजनिक सूचनाएं विभागों को स्वयं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि नागरिकों को सामान्य जानकारी के लिए बार-बार आवेदन लगाने की आवश्यकता न पड़े।
चर्चा के दौरान DoPT की ओर से सुझाए गए विस्तारित प्रकटीकरण बिंदुओं और आरटीआई अधिनियम में निर्धारित सूचनाओं के सार्वजनिक प्रकटीकरण के बीच के अंतर पर भी चर्चा हुई। बैठक में सरकारी वेबसाइटों पर पुरानी जानकारी, निष्क्रिय या गलत संपर्क विवरण और अस्पष्ट स्कैन किए गए दस्तावेजों को सूचना तक पहुंच में बड़ी व्यावहारिक बाधा बताया गया।
वक्ताओं ने उपलब्ध ऑडिट संबंधी आंकड़ों का हवाला देते हुए धारा 4 के अनुपालन की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। साथ ही नियमित थर्ड पार्टी ऑडिट और प्रकटीकरण व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
सूचना आयोगों में रिक्त पदों पर चिंता
बैठक में मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा हुई। सत्येंद्र सिंह, सुनील खंडेलवाल, जयपाल सिंह खींची, फतेह चंद्र गुलेरिया, देवेंद्र अग्रवाल, राज तिवारी, आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए।
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया, आयोगों में रिक्त पद और लंबित मामलों के कारण सूचना के अधिकार के प्रभावी इस्तेमाल में आने वाली दिक्कतों पर विचार किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि आयोगों की संस्थागत क्षमता मजबूत किए बिना आरटीआई व्यवस्था को अपेक्षित गति देना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
मनरेगा से लेकर निर्माण कार्यों तक उठे सवाल
बैठक में अलग-अलग राज्यों से जुड़े कई मामलों पर भी विशेषज्ञों से सलाह ली गई। मनरेगा निधि में कथित अनियमितता और पुलिस जांच में कार्रवाई नहीं होने के मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई।
नगर परिषद के निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता से जुड़े सवाल पर आरटीआई के तहत रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के निरीक्षण के अधिकार की जानकारी दी गई। वहीं किसी परिसर या निजी सामग्री का नमूना लेने के लिए सक्षम कानूनी अधिकार और संबंधित विभाग की प्रक्रिया का पालन आवश्यक बताया गया।
फसल बीमा और भर्ती प्रक्रिया पर भी चर्चा
फसल बीमा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामलों में उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने सूचना में अनावश्यक देरी से होने वाले नुकसान के दस्तावेजी प्रमाण सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए विज्ञापन, आवेदन और संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता तथा डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रकाशित भर्ती विज्ञापनों और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सलाह दी गई।
धारा 4 के प्रभावी पालन पर जोर
बैठक के अंत में आरटीआई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियमित थर्ड पार्टी ऑडिट, लोक सूचना अधिकारियों के प्रशिक्षण, नागरिकों में जागरूकता और प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
प्रतिभागियों का कहना था कि यदि सार्वजनिक प्राधिकरण धारा 4 के तहत निर्धारित सूचनाओं को नियमित रूप से और अद्यतन स्वरूप में सार्वजनिक करें, तो नागरिकों को सामान्य जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार आरटीआई आवेदन और अपील की प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम हो सकती है।
बैठक में तय किया गया कि आरटीआई से जुड़े इन मुद्दों और आगे की रणनीति की समीक्षा आगामी रविवार को होने वाली बैठक में की जाएगी।




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