रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज, पीएम को भेजा ज्ञापन

रीवा। सिरमौर क्षेत्र के रोझौही-क्योटी इलाके में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी के नेतृत्व में नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने संभागायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर परियोजना पर पुनर्विचार की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित परियोजना घनी आबादी वाले क्षेत्र के निकट है, जिससे विकिरण, तकनीकी दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य आपात स्थितियों का खतरा बना रहेगा। साथ ही संयंत्र के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होने से रीवा और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है।
विरोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि परियोजना से क्षेत्र की जैव विविधता, कृषि व्यवस्था और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित निपटान को भी गंभीर चुनौती बताते हुए भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने की बात कही है।

ज्ञापन में विश्व की प्रमुख परमाणु दुर्घटनाओं—चेर्नोबिल, फुकुशिमा, थ्री माइल आइलैंड और टोकाइमुरा—का उल्लेख करते हुए परमाणु परियोजनाओं से जुड़े संभावित खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। साथ ही क्योटी जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों और स्थानीय रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई है।

नागरिकों ने सरकार से परियोजना के लिए वैकल्पिक स्थल तलाशने, प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जनसुनवाई कराने, स्वतंत्र पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा परमाणु ऊर्जा के स्थान पर सौर और पवन ऊर्जा जैसे सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि रीवा पहले ही देश की प्रमुख सौर ऊर्जा परियोजनाओं में अपनी पहचान बना चुका है, इसलिए क्षेत्र के विकास के लिए हरित ऊर्जा मॉडल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मामले को लेकर प्रशासन और सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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