लाड़ली बहना योजना में बड़ा विवाद: 500 से अधिक महिलाओं के नाम कटे, बिना सहमति बताए बंद हुई किस्त


सीधी। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, जिसे प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक मजबूती का आधार माना जा रहा है, एक बार फिर विवादों में आ गई है। योजना के अंतर्गत पांच सौ से अधिक महिला हितग्राहियों के नाम अचानक सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली मासिक सहायता राशि बंद हो गई है। इस फैसले से प्रभावित महिलाएं और उनके परिवार गहरे सदमे और आर्थिक संकट में हैं।

अचानक बंद हुई राशि, महिलाएं परेशान

प्रभावित महिलाओं का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित जानकारी के उनकी किस्त रोक दी गई। कई महिलाओं को तो महीनों बाद पता चला कि उनका नाम योजना से पूरी तरह हटा दिया गया है। जिन परिवारों की मासिक जरूरतें इस राशि पर निर्भर थीं, उनके लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल बन गई है।

विभाग का दावा: स्वयं किया लाभ परित्याग

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन महिलाओं ने स्वयं योजना का लाभ छोड़ने (लाभ परित्याग) का विकल्प चुना है। अधिकारियों के अनुसार, लाड़ली बहना योजना के पोर्टल पर एक लाभ परित्याग आश्वासन का विकल्प मौजूद है।

इस विकल्प पर क्लिक करने पर हितग्राही के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) भेजी जाती है।

ओटीपी दर्ज होते ही महिला को लाभ परित्याग की श्रेणी में डाल दिया जाता है।

इसके बाद योजना का लाभ दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता।

विभाग का दावा है कि हितग्राही की सहमति के बिना कोई अधिकारी या अन्य व्यक्ति इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सकता।

महिलाओं का आरोप: ओटीपी और प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं

वहीं, दूसरी ओर प्रभावित महिलाओं और उनके परिजनों ने विभाग के दावों को सिरे से खारिज किया है। महिलाओं का कहना है कि

उन्होंने कभी लाभ परित्याग का विकल्प नहीं चुना, न ही किसी प्रकार की ओटीपी साझा की, और न ही उन्हें यह जानकारी दी गई कि ऐसी कोई प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कुछ महिलाओं का आरोप है कि डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी के अभाव या तकनीकी गड़बड़ी के चलते उनके नाम गलत तरीके से काट दिए गए।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों की बाढ़

किस्त बंद होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें दर्ज कराई हैं। इससे विभाग पर शिकायतों का दबाव बढ़ गया है।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इन शिकायतों को “फोर्स क्लोज” किया जा रहा है, यानी बिना ठोस जांच या सुनवाई के ही शिकायतों को बंद कर दिया जा रहा है। इससे महिलाओं में आक्रोश और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

यह पूरा मामला अब योजना की पारदर्शिता और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या वाकई सभी मामलों में हितग्राही की सहमति ली गई?
कहीं तकनीकी त्रुटि या किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई? और अगर गलती हुई है, तो क्या महिलाओं को दोबारा योजना में शामिल किया जाएगा?

महिलाओं की मांग

प्रभावित महिलाओं ने मांग की है कि
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए,
गलत तरीके से हटाए गए नामों को दोबारा योजना में जोड़ा जाए,
और जब तक जांच पूरी न हो, तब तक किस्त बहाल की जाए।

यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं किया गया, तो यह विवाद आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।


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