कर्ज के बोझ में डूब रही शिवराज सरकार एक बार फिर दो हजार करोड़ का कर्ज लेगी
भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार की माली हालत खराब चल रही है है हाल ये है कि सरकार को विकास और योजनाओं को धरातल पर लाभ पहुंचाने के लिए बार-बार कर्ज उठाना पड़ा रहा है एक बार फिर से मध्यप्रदेश सरकार 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है सरकार 31 जनवरी को 2000 करोड़ का कर्ज लेगी प्रदेश में विकास परियोजनाओं और आर्थिक विकास की गतिविधियों को गति देने के लिए सरकार दो हजार करोड़ रुपये का ऋण लेगी । भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से यह ऋण 31 जनवरी को लिया जाएगा । प्रदेश के ऊपर अभी तक तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण हो चुका है । वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2022 की स्थिति में सरकार के ऊपर दो लाख 95 हजार करोड़ रुपये का ऋण था । जून 2022 से नवंबर 2022 तक 12 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया गया । इसके बाद अब दो हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने के लिए सूचना जारी की गई है । विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए इस राशि का उपयोग किया जाएगा । प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2022-23 में 40 हजार करोड़ रुपये तक ऋण ले सकती है । वैट और जीएसटी में लक्ष्य से ज्यादा आमदनी प्रदेश में इस वर्ष राजस्व प्राप्ति अभी तक वैट और जीएसटी में लक्ष्य से अधिक रही है । दिसंबर तक वैट के माध्यम से सरकार को 12 हजार 650 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं । जबकि , लक्ष्य 12 हजार 500 करोड़ रुपये था । इसी तरह जीएसटी के माध्यम से 17 हजार 885 करोड़ रुपये का लक्ष्य था । दिसंबर तक 20 हजार 300 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो चुकी है । हालांकि , आबकारी से नौ हजार 528 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध नौ हजार 200 और पंजीयन एवं मुद्रांक से छह हजार 550 के विरुद्ध छह हजार 200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है । सरकार ने राजस्व अर्जन करने वाले सभी विभागों के लक्ष्य में वृद्धि कर दी है और वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि प्रस्तावित की गई है ।




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