RTI एक्ट को मजबूत बनाने पर 319वीं बैठक में मंथन: दंड प्रावधानों के कमजोर अमल से लेकर सूचना आयोगों में लंबित मामलों तक उठे सवाल



आरटीआई आवेदनों में महज 0.5% मामलों में जुर्माना, 99.5% में कार्रवाई नहीं होने का दावा; धारा 4 के तहत स्वतः सूचना सार्वजनिक करने पर जोर

नई दिल्ली। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को और प्रभावी बनाने तथा देश में पारदर्शिता के ढांचे को मजबूत करने को लेकर 2 जुलाई 2026 को 319वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने की। इसमें आरटीआई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, सूचना आयोगों में लंबित मामलों, जन सूचना अधिकारियों (PIO) के प्रशिक्षण और आरटीआई आवेदकों की सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

दंड प्रावधानों के कमजोर अमल पर चिंता

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि आरटीआई आवेदनों से जुड़े मामलों में दोषी अधिकारियों पर दंड लगाए जाने की दर बेहद कम है। दावा किया गया कि करीब 0.5% मामलों में ही जुर्माना लगाया जाता है, जबकि लगभग 99.5% मामलों में दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती। प्रतिभागियों ने इसे आरटीआई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के सामने बड़ी चुनौती बताया।
सूचना आयोगों में लंबित मामले और स्टाफ की कमी

बैठक में केंद्रीय और राज्य सूचना आयोगों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई गई। इसके साथ ही जन सूचना अधिकारियों के पर्याप्त प्रशिक्षण और आयोगों में आवश्यक स्टाफ उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई, ताकि सूचना मांगने वाले नागरिकों को समय पर जानकारी मिल सके।

छूट की धाराओं के इस्तेमाल पर भी सवाल

प्रतिभागियों ने कहा कि कई मामलों में लोक प्राधिकारियों द्वारा आरटीआई अधिनियम की छूट संबंधी धाराओं का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि छूट का प्रयोग कानून की भावना और निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही होना चाहिए।

धारा 4 के तहत स्वतः जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

बैठक में आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के प्रभावी अनुपालन को प्रमुख सुधार के रूप में सामने रखा गया। सुझाव दिया गया कि सरकारी विभाग महत्वपूर्ण सूचनाओं को स्वतः सार्वजनिक करें, ताकि नागरिकों को सामान्य जानकारी हासिल करने के लिए बार-बार आरटीआई आवेदन दाखिल करने की जरूरत न पड़े। इससे सूचना आयोगों और लोक सूचना अधिकारियों पर आवेदनों का दबाव भी कम हो सकता है।

एकीकृत डिजिटल पोर्टल बनाने का सुझाव

सभी राज्य सूचना आयोगों को एक केंद्रीकृत एवं एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की सिफारिश की गई। इसमें बहुभाषी सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि देश के अलग-अलग हिस्सों के नागरिक आसानी से आरटीआई आवेदन, अपील और संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें।

PIO के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण की जरूरत

जन सूचना अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने और नियमित प्रशिक्षण को अनिवार्य करने की बात कही गई। प्रतिभागियों का मानना था कि PIO को कानून, अपवाद धाराओं, सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और समय-सीमा की स्पष्ट जानकारी होने से आरटीआई मामलों में अनावश्यक विवाद कम हो सकते हैं।

आरटीआई आवेदकों की सुरक्षा के लिए ढांचे की मांग

बैठक में आरटीआई कार्यकर्ताओं और सूचना मांगने वाले नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। धमकी, दबाव और उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए समर्पित सुरक्षा तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई गई। व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई।

प्रमाणित प्रतियां, दूसरी अपील और NGO की रिपोर्टिंग पर चर्चा

बैठक में आरटीआई अधिनियम की धारा 2 के तहत प्रमाणित प्रतियां हासिल करने की प्रक्रिया, आरटीआई आवेदनों के हस्तांतरण, द्वितीय अपील, गैर-सरकारी संगठनों की वित्तीय रिपोर्टिंग तथा गोपनीयता और जनहित के बीच संतुलन जैसे व्यावहारिक और कानूनी मुद्दों पर भी सवाल-जवाब हुए।

प्रतिभागियों को उपलब्ध कराई जाएगी बैठक की सामग्री

बैठक में तय किए गए अगले कदमों के तहत प्रतिभागियों के साथ प्रस्तुति की स्लाइड और बैठक की रिकॉर्डिंग साझा करने की बात कही गई। इसके अलावा PIO के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और आरटीआई से जुड़े प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने तथा प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए विशिष्ट कानूनी एवं आरटीआई मामलों पर मार्गदर्शन देने की बात भी सामने आई।

सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ताओं की रही भूमिका

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और देवेंद्र अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। प्रचार-प्रसार में पवन दुबे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बैठक में जयपाल सिंह खींची, फतेह चंद्र गुलेरिया, राज तिवारी, नरेश सैनी, सुरेश मौर्य सहित अन्य प्रतिभागी शामिल हुए।

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