शुभम सोनी भोपाल। मध्य प्रदेश में नकली बीज माफिया पर शिकंजा कसने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। प्रदेश के पूर्व कृषि सलाहकार परिषद सदस्य केदार सिरोही ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर बीज प्रमाणीकरण में हो रही गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। इस पत्र में सिरोही ने बीज उत्पादन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नकली बीज माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
दिलचस्प बात यह रही कि सिरोही के इस गंभीर शिकायत पत्र को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी संज्ञान में लिया और अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा कर इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का काम किया। दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में लिखा कि किसानों की मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
क्या हैं सिरोही की मांगें?
सिरोही ने अपने पत्र में प्रदेश में बीज प्रमाणिकरण की लचर व्यवस्था और कागजी खानापूर्ति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बीज उत्पादक कंपनियों के गोदामों में वास्तविक बीज का स्टॉक ही नहीं है, फिर भी केवल कागज़ों पर प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाते हैं। इससे नकली बीज का कारोबार फल-फूल रहा है और किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच रहे हैं।
✅ भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए, जिसमें बीज निरीक्षक, कृषि विभाग के कर्मचारी और पटवारी की उपस्थिति रहे।
✅ सत्यापन की वीडियोग्राफी व लोकेशन सहित फोटो अनिवार्य हो, ताकि कोई भी फर्जीवाड़ा न कर सके।
✅ कागजी खानापूर्ति पर रोक लगे, और जिनके पास असली स्टॉक नहीं है उनका लाइसेंस रद्द किया जाए।
✅ हर जिले में विशेष निगरानी टीम बने, जिसमें कलेक्टर, कृषि विभाग और यदि संभव हो तो मीडिया को भी शामिल किया जाए।
किसानों के भविष्य का सवाल
सिरोही का कहना है कि यह सिर्फ बीज की बात नहीं, किसानों के भविष्य और प्रदेश की कृषि साख का प्रश्न है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो नकली बीज माफिया किसानों को कर्ज में डुबो देंगे और मध्य प्रदेश की छवि को गहरा धक्का लगेगा।
अब सरकार की बारी
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के समर्थन और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे के वायरल होने के बाद अब प्रदेश सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस मामले में त्वरित और ठोस कार्रवाई करे। किसान संगठनों और जागरूक नागरिकों की नजरें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




0 टिप्पणियाँ