भोपाल। मध्यप्रदेश में ईमानदारी का बेंचमार्क कर रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी श्री राधेश्याम जुलानिया के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय मध्य प्रदेश द्वारा प्रकरण क्रमांक 0094/ई/22 किया गया।
दरअसल इस शिकायत के बाद लोकायुक्त संगठन के विधि अधिकारी अवधेश कुमार गुप्ता ने शिकायत कर्ता को लिखित सूचना दी है कि उनकी शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन ने रिटायर आईएएस राधेश्याम जुलानिया के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
जानकारी के अनुसार भोपाल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नेमीचन्द जैन ने 2 अगस्त को लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि जुलानिया रिटायरमेंट के बाद जिस बंगले में रहते हैं उसका भूखण्ड उन्होंने स्वयं और पत्नी अनिता जुलानिया के नाम खरीदा है। इस भूखंड को खरीदने की रकम अर्नी इन्फा के खाते से अलग अलग बैंक खातों में घुमाकर जुलानिया के एकाउंट में भेजी गई थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि जनवरी 2021 में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने अर्नी इंफ्रा के मालिक आदित्य त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था। ईडी से जानकारी मिली थी कि अर्नी इंफ्रा मुखौटा फर्म है जो जल संसाधन विभाग के सबसे बड़े ठेकेदार राजू मेंटाना की ओर से मध्य प्रदेश के वरिष्ठ अफसरों को रिश्वत बांटने का काम करती है। अर्नी इंफ्रा को मेंटाना की ओर से करीब 93 करोड़ का काम सबलेट के नाम से मिला था।
शिकायतकर्ता ने आरोपों लगाते हुए कहा कि जिस समय जुलानिया जल संसाधन विभाग में थे और मेंटाना वहां ठेकेदार फर्म थी, उसी समय जुलानिया की बेटी लवण्या जुलानिया हैदराबाद में मेंटाना की ही एक कंपनी में जाॅब कर रही थी। और इसकी सूचना जुलानिया ने राज्य सरकार को नहीं दी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने 22 अगस्त 2016 को जुलानिया को जल संसाधन विभाग से हटाया और आईएएस पंकज अग्रवाल को जल संसाधन की कमान सौंपी थी। मिली जानकारी के अनुसार पंकज अग्रवाल के कार्यकाल में मेंटाना कंपनी को ब्लेक लिस्टेड कर दिया गया था।
लेकिन मेंटाना के ब्लेक लिस्टेड होते ही अचानक सरकार ने पंकज अग्रवाल को हटाकर जुलानिया को फिर से जल संसाधन में पदस्थ किया। और जुलानिया के जल संसाधन में आते ही मेंटाना को ब्लेक लिस्ट से हटाकर फिर से काम सौंप दिया। शिकायतकर्ता ने राधेश्याम जुलानिया द्वारा अपने बेटे अभिमन्यु जुलानिया को 1 करोड़ रूपए विदेश भेजने की जांच की भी मांग की है।





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